को प्रमाणित करने की आवश्यकता आ चुकी है। इसलिए हर नर-नारी को सुखी होने के अर्थ में जीना स्वीकार है। इसे सार्थक, सुलभ अथवा सर्वसुलभ होने के अर्थ में मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्व वाद के अंग भूत व्यवहारात्मक जनवाद (पुस्तक) प्रस्तुत हुआ है। भ.व. (82-84)

समाधान मानव परम्परा के लिए स्वीकृत आवश्यकता, प्रधान आवश्यकता अथवा परम आवश्यकता है। समाधान अपने में क्यो, कैसे का सहज उत्तर है। हर मुद्दे के साथ क्यो, कैसे, कितना का प्रश्न होता ही है। जितने भी क्यों की बात आती है या प्रश्न उठता है उसका उत्तर का आधार मूल कारण ही होता है। कैसे का उत्तर हम पाने के लिए दौड़ते हैं। प्रक्रिया, प्रणाली पद्धति के सूत्रों के आधार पर प्रक्रियाएँ स्पष्ट हो जाती है। कितना का उत्तर, फल परिणाम और आवश्यकता की तृप्ति के अर्थ में स्पष्ट हो जाता है। इसकी स्पष्ट चर्चा करने के योग्य इकाई केवल मानव ही है।

सहअस्तित्व को समझना ही जागृति है। जागृति = सुख।

व्यवस्था सह अस्तित्व सहज अभिव्यक्ति है। यह अस्तित्व सहज रूप में हैं। अस्तित्व सदा ही सह अस्तित्व के रूप में वर्तमान है। सह अस्तित्व ही व्यवस्था के रूप में व्याख्यायित और व्यक्त है। व्यवस्था और उसकी अक्षुण्णता (निरंतरता) के प्रति मानव भ्रमित रहा, अत: मानव का पीड़ित रहना अवश्यंभावी रहा। इसीलिए अव्यवस्था की समझ मानव को आदि काल से ही पीड़ा के रूप में रही है।

मानव व्यवस्था की आशा आकांक्षा के आधार पर ही परिवर्तनों को स्वीकारते आया है।

मानव का विभिन्न इतिहास इस बात को उजागर करता है। और इस समय में अथवा इस संघर्ष युग में मानव ने अपने आप में सुविधा भोग के लिए द्रोह, विद्रोह, शोषण और युद्ध को निश्चित औजागर मान लिया है। आज की स्थिति में सुविधा की परिभाषा यही दिखाई पड़ रही है। मानव जाति जिसको सुविधा मान रही है उसका मूल ध्रुव संग्रह है।

संग्रह पर ही सुविधा और भोग टिका हुआ है।

यह पूर्णतया शहरी जिंदगी में इसी प्रकार दिखाई पड़ता है। शहर में अच्छी सड़कें, अच्छा घर, अच्छी गाड़ी, अच्छी दवाई, अच्छे खिलौने, और घर के अंदर जितने भी आधुनिक, अत्याधुनिक ग्रहशोभा और उपयोगी मानी गई चीजें, जैसे फ्रिज, कूलर, वातानुकूलन, मिक्सी, ग्राइंडर और छत पर सजाने के लिए सभी इंतजामात, चमकता हुआ बाथरुम, बैडरूम, ड्राइंग रूम और किचन, इन्हीं प्राप्त सुविधाओं को प्रमाणित करने की स्थली माना गया है। साथ ही घर में मनोरंजन के लिए टीवी, रेडियो, फोटोग्राफिक कैमरे, रिकॉर्डर माने गए हैं। सुविधाजनक खुशहाली की अभिव्यक्ति कैमरा, वीडियो कैमरा, बड़े-बड़े एल्बम हैं। इनको उपलब्धि माना जाता है। इन सभी सुविधाओं को आदर्श मानकर प्राप्त कर लिया गया है।

सुविधा के लिए संपूर्ण स्त्रोत यह धरती है। धरती से प्राप्त पदार्थों को सुविधा योग्य बनाना, उसकी तकनीकी प्रक्रिया के लिए प्रौद्योगिकी अभ्यास इस धरती पर स्थापित हो चुका है।

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