ऐसे स्थिति में भी किसी न किसी मानव में अनुसंधानिक आवश्यकता उत्पन्न होकर स्वयं जागृत होने के उपरांत जागृत परंपरा के लिए स्त्रोत बन जाता है। भ्रमात्मक विधि से भी चित्रण-विश्लेषण के आधार पर बहुत अनुसंधान हुए हैं। जबकि जागृति सहज अनुसंधान मानव, मानव व्यवस्था मानव संचेतना सहज विधि से प्रस्तावित होना परंपरा में स्वीकृत होना, लोकव्यापीकरण होना एक आवश्यकीय स्थिति रही। अ.व. (76-83)
जागृति की अनिवर्तया
मानव जागृत होकर ही सुखी, समृद्घ तथा सुन्दरतम रूप में दिखाई पड़ता हैं। प्रत्येक मानव सुखी, समाधानित, समृद्घ और सुन्दर रहना ही चाहता है। परंपरा की अजागृति के कारण ही अथवा जागृति पूर्ण न होने के फलस्वरुप ही मानव कुंठा और अभाव से ग्रसित रहता है। यह मानव परंपरा सहज जागृति क्रम में पाये जाने वाले मानव की स्थिति हैं। भ. व. (113)
अस्तित्व में अनुभव ही परम प्रमाण के रूप में सर्वतोमुखी समाधान सहज विधि से प्रमाणित होता है। हर व्यक्ति जागृतिपूर्वक इसे प्रमाणित कर सकता है। इसकी आवश्यकता सब में विद्यमान है यही सार्वभौम व्यवस्था अखण्ड समाज है। इसके विपरीत यह मानना सर्वथा भ्रम है कि समाधान अपना-अपना और सत्य अपना-अपना होता है। अ.व. (108)
जागृति में संक्रमित होने के उपरान्त मानव में मानवीय व्यवस्था उदय होना पाया जाता है। उसके पहले जागृति क्रम में रहते हुए अमानवीय विधि से अर्थात जीवो के सदृश्य रहते है। अव्यवस्था के चपेट में आ जाते है। यही समस्या से घिर जाने का तात्पर्य है। जागृति के अनन्तर ही मानव और मानवीयता की अविभाज्य वर्तमानता तथा शरीर और जीवन के संयुक्त प्रकाशन में मानव परम्परा होने अर्थात विवेक और विज्ञान सम्पन्न हो पाते हैं। हर मानव जागृत होने योग्य है प्रकारान्तर से हर मानव जागृति को ही सम्मान कर पाता है।
समाधान अपेक्षा मानसिकता और रोग मुक्त शरीर और उसे बनाए रखना ही मानव में स्वस्थता का तात्पर्य है। यह जागृत विधि से ही सफल है। मानव ही जागृतिपूर्वक धरती का संतुलन को बनाए रख पाता है। भ्रमित होकर धरती के साथ सारा अत्याचार किया। इसका एक उपाय जागृत होना ही है। जागृति अपने आप से लोकव्यापीकरण होना पाया जाता है। ज.व. (138-140)
हर व्यक्ति समृद्धि, समाधान, अभय, सह-अस्तित्वशील रहना चाहता ही है। यही सर्व जनमानस का शुभेच्छा है। इन शुभेच्छाओं के आधार पर ही एक दूसरे से अपेक्षा भी करता है। उल्लेखनीय घटना यही है सर्वमानव शुभ चाहते हुए भी भ्रम से ग्रसित हो जाता है।