शिक्षा का लोकव्यापीकरण करने की आवश्यकता है। चारो अवस्था में संतुलित बिन्दु में लाने के लिए सहअस्तित्ववादी विधि को अपनाना ही होगा। क.द. (119-122)

3.1.2 मानवीय स्वभाव, व्यवहार के नियम

मानव स्वभाव

मानव की मौलिकता (स्वभाव), मानवीयता ही होना एक उद्गार बन जाता हैं। इसे तात्विक रूप में और अस्तित्व सहज विधि से परीक्षण, निरीक्षण और सर्वेक्षण करने से यह स्पष्ट होता है कि “अस्तित्व में प्रत्येक एक अपने ‘त्व’ सहित व्यवस्था है और समग्र व्यवस्था में भागीदार हैं।” इसी क्रम में मानव का, मानवत्व सहित व्यवस्था होना कल्पना सहज भाषा है। कल्पना सहज अपेक्षा है। व्यवहार सहज अपेक्षा इन अपेक्षाओं के अनुरुप में प्रयास होना एक स्वाभाविक प्रवर्तन और प्रयास है। इसी क्रम में मानव मानवत्व को सहज रूप में पहचान सकता है।

मानव का अध्ययन, विधिवत् करने पर पता चलता हैं कि मानव (चैतन्य) जीवन और (जड़) शरीर के संयुक्त रूप में हैं।

जीवन जागृति पूर्वक तृप्त होता हैं। तब मानवीयता अपने आप व्यवहार में प्रमाणित होती हैं। अजागृति की स्थिति में जो मानव भ्रमवश व्यक्त होता है; वह अतिव्याप्ति, अनाव्याप्ति और अव्याप्ति दोषों के रूप में मूल्यांकित होता है। इस प्रकार मानव अजागृतिवश जिन स्वभावों को व्यक्त करता है, उसका स्वरुप निम्न तीन प्रकारों से गण्य होता है-

दीनता- यह अभाव, अक्षमतावश प्रताड़ित रूप में देखने को मिलता है।

विश्वासघात - जो छल, कपट, दंभ, पाखंड है।

  • <strong>क्रूरता-</strong> यह परधन, पर-नारी, पर-पुरुष और पर-पीड़ा के रूप में देखने को मिलता है। यही अमानवीयता का स्वरुप हैं। यह भ्रमवश ही होने वाला प्रकाशन है।
  • <strong>मानवीयता मानव का स्वभाव है।</strong> यह जागृतिपूर्वक व्यक्त हो पाता है। जीवन ही जागृत होता है। व्यक्त करने वाला मानव ही हैं। यह तीन प्रकार से सार्थक होना पाया जाता है-
  • <strong>धीरता :-</strong> यह न्याय के प्रति निष्ठा, द़ृढ़ता और विश्वास के रूप में दिखाई पड़ता है। यह सब आचरण में प्रमाणित होते हैं। न्याय का मूल स्वरुप जो मानव में दिखाई पड़ता है, यह संबंधों की पहचान और मूल्यों का निर्वाह है। संबंध परस्परता में रहता ही है, उसे पहचानना जागृति हैं। निर्वाह करना निष्ठा है। मूल्यांकन करना व्यवस्था सहज गति है।

वीरता:- यह धीरता सहज रूप में जो अभिव्यक्तियाँ होती हैं, वे रहते हुए दूसरों को न्याय सुलभ कराने में, अपने तन-मन-धन को नियोजन करता है।

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