ईश्वर केन्द्रित (रहस्य मूलक) दृष्टिकोण | भौतिकवादी दृष्टिकोण |
लक्ष्य = भक्ति, विरक्ति; मोक्ष, स्वर्ग (रहस्यमयी); विधिवत अध्ययन का आधार नहीं बना; परिवार – समाज का स्रोत नहीं; फलत: असामजिक ; मोक्ष का प्रमाण नहीं; फलत: परम्परा नहीं होगा; | लक्ष्य – सुविधा संग्रह -> भोग, बहुभोग, अतिभोग प्रकृति पर शासन, दोहन, फलत: अव्यवस्था यंत्र बनाकर लाभ बनाकर रखें; सुविधा-संग्रह का तृप्ति बिंदु नहीं , फलत: असामाजिक डायरी २००० /217 |
आदर्शवादी मानसिकता | भौतिकवादी मानसिकता |
(1) चेतना से वस्तु पैदा होती है। सर्वशक्ति मान ब्रह्म, देवता, ईश्वर से सब कुछ संचालित होता है। सर्वशक्ति से भयभीत होकर ही ग्रह गोल अपना- अपना काम करते हैं। | (1) वस्तु से चेतना पैदा होती है। प्रकृति सब कुछ है। सब कुछ अस्थिर एवं अव्यवस्था की ओर है। |
(2) अहिंसा का पक्षधर। | (2) पैसा व पद से प्रबंधन होता है। |
(3) सहिष्णु। | |
(4) धरती के साथ नहीं के बराबर व जंगलों का आंशिक शोषण। | (4) धरती व इसके वातावरण के साथ अधिकतम अपराध, पर्यावरण के साथ अपराध करना। |
(5) आस्था के लिए पीढ़ी से पीढ़ी पर बल। | (5) भोगवाद के लिए पीढ़ी से पीढ़ी पर बल। |
Table of contents
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मूल तत्व अवलोकन
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टिपण्णी
1
प्रणेता संदेश
2
अध्याय 1: भूमिका
13
अध्याय 2: सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व
68
अध्याय 3: चैतन्य “जीवन”
131
अध्याय 4: मानवीयतापूर्ण आचरण
205
अध्याय 5: परिवार व्यवस्था में जीना
230
अध्याय 6: मानवीय परम्परा – अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था
290
अध्याय 7: सारांश
314
अध्याय 8: वाङ्मय एवं अध्ययन