आदर्शवाद से उत्पन्न विसंगतियाँ

भौतिकवाद तकनीकी कर्माभ्यास से स्वीकृत उपलब्धियां

(1) ईश्वर रूपी सद्ग्रन्थों में।

(1) दूर-श्रवण, दूरदर्शन, दूरगमन, के लिए यंत्र उपकरण।

(2) पावन ग्रन्थों पर आधारित विचार शैलियों में।

(2) घरेलू एवं कृषि प्रौद्योगिकी यंत्र उपकरण।

(3) ऐसे विचार शैलियों पर आधारित शास्त्रों में।

(4) शास्त्रों पर आधारित समुदाय मानसिकता में।

(5) समुदाय मानसिकता के आधार पर जीवन की शैली में मतभेद दृष्टव्य है।

इन दोनों सविरोधी विचारों की स्वीकृत प्रवृत्तियां (पांच)

विरक्ति, भक्तिवादी (प्रयास प्रवृत्ति)

लाभोन्मादी, भोगोन्मादी, कामोन्‍मादी (संघर्ष कर्म प्रवृत्ति)

- म.वि. - ९३-९४

(C) ‘विकल्प’ = सहअस्तित्ववाद

(*उपरोक्त विशेलषणानुसार) भौतिकवाद से मानव को समझने, मानव के जीने का कोई स्पष्ट स्वरूप निकलता नहीं।दू सरी ओर, अध्यात्मवाद, आदर्शवाद, ईश्वरवादी परम्पराएं रहस्य में फँस गए, एवं वादग्रस्त हो गए हैं। इन सब में शुभ कामना रहते हुए मानव, मानव बनकर जीने योग्य स्पष्ट ज्ञान, विवेक, विज्ञान, विचारशैली, व्यवहार विधि, समाज एवं व्यवस्था का स्वरूप निकला नहीं - संवाद)

यह सम्पूर्ण मेधावियों में स्पष्ट हो चुका है। अतएव इसका विकल्प गतिशील होना ही एकमात्र उपाय है।

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