- पदार्थावस्था में जितने भी प्रजाति के परमाणु, रासायनिक अणु रचना के लिए आवश्यक हैं, उससे वह समृद्घ होते तक, अपने में परमाणु के रूप में विकासरत रहता है।
- समृद्घ पदार्थावस्था के अनंतर ही प्राणावस्था की समृद्घि, प्राणावस्था के अनंतर जीवावस्था की समृद्घि, जीवावस्था के अनंतर ज्ञानावस्था में मनुष्य का सह-अस्तित्व के रूप में वर्तमानित होना, इस धरती पर प्रमाणित है।
- जागृति पूर्णता और उसकी निरंतरता होना, लक्ष्य है।
- जागृति क्रम में अखंड सामाजिकता और सार्वभौम व्यवस्था मानव परम्परा में होना इसलिए आवश्यक है कि मानव को जागृति का अवसर, सहज सुलभ हो सके।
- परमाणु में विकास होता है, विकास क्रम में चैतन्य पद प्रतिष्ठा अथवा जीवन-पद होना पाया जाता है।
- जीवन, गठन पूर्ण परमाणु है, जिसकी निरंतरता वश, जीवन का शाश्वत होना पाया जाता है।
- जीवन-जागृति क्रम में, सर्वतोमुखी समाधान व प्रामाणिकता को प्रमाणित करने के क्रम में, जीवन सदा प्रयासशील है।
- पूर्णता अपने में निरंतर है। इसका सामान्य स्वरूप, अस्तित्व में पूर्णता, परम्परा के रूप में प्रकाशित है। अस्तित्व में पूर्णता, गठन पूर्णता, क्रिया पूर्णता, आचरण पूर्णता ही है। – म.वि. 189
- मध्यस्थ दर्शन मूलत: मध्यस्थ सत्ता, मध्यस्थ क्रिया, मध्यस्थ गति और मध्यस्थ जीवन का प्रतिपादन है जो वाङ्मय के रूप में स्पष्ट हो चुका है जिसके अध्ययन से मानवीयतापूर्ण आचरण स्वयं स्फूर्त रूप में प्रमाणित होता है। अ.श.: 202
- मानव परम्परा की स्थिरता, मानवत्व सहित व्यवस्था ही है। यह जागृति पूर्वक मानव में, से, के लिये प्रमाणित होता है। जागृति स्वयं निश्चित है।
- मानवत्व की स्थिरता का तात्पर्य विकास और जागृति का निश्चित ध्रुव प्रामाणिकता, प्रमाण और उसकी अक्षुण्ता से है और सहज रूप में लोक न्याय, सबको मिलने से है। लोक-न्याय मिलने के लिए मानव परम्परा को जागृत रहना आवश्यक है।
’मानवीयतापूर्ण आचरण’ मूल्य, चरित्र, और नैतिकता का संयुक्त रूप है। मूल्य, जागृत मानव सहज अभिव्यक्ति में जीवन मूल्य, मानव मूल्य, स्थापित मूल्य, शिष्ट मूल्य, मानव के संदर्भ में है। उपयोगिता मूल्य, कला मूल्य प्राकृतिक ऐश्वर्य पर निपुणता कुशलता पूर्ण श्रम नियोजन पूर्वक उपयोगिता मूल्य और कला मूल्य मूल्यांकित होता है। मूल्यों के आधार पर ही मानव लक्ष्य निर्धारित होता है। मानव लक्ष्य समाधान, समृद्घि, अभय, सह-अस्तित्व, समझदारी और जागृति ही है। जिसमें से मानव मूल्य धीरता, वीरता, उदारता, दया, कृपा, करुणा है।