जीवन और मानवीयता पूर्ण आचरण को समझ चुके हैं। यही समझ का स्वरूप है। समझदारी के अनुरूप विचार विश्लेषण एवं योजना रूपी ईमानदारी का पक्ष है। फलस्वरूप कार्य व्यवहार रूप में प्रमाणित होना बनता है। इसी क्रम में शरीर और जीवन संतुलन को मूल्यांकित करना मूल्यांकित होना स्वाभाविक है। शरीर का संतुलन अपने में जीवन जागृति को प्रकाशित करने के अर्थ में सार्थक होना पाया गया है। यह भी देखा गया, समझा गया कि जीवन जागृति को प्रकाशित, संप्रेषित, अभिव्यक्त करने के क्रम में शरीर में व्यतिरेक निम्नतम होना पाया गया। जो कुछ भी व्यतिरेक होना पाया गया वह नैसर्गिक घटना क्रम में ही घटित होना पाया गया। अस्तु, शरीर और जीवन मानसिकता का संतुलन सहज होने में स्पष्ट नजरिया समझ में आता है।

धीरता-वीरता पूर्वक ही परिवार में संतुलन हैं। परिवार संतुलन के लिये परिवार में भागीदारी करने वाले सभी मानव सम्मिलित रहते है। ये सभी समझदार हैं अथवा होना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में परिवार संतुलन सहज रूप में प्रमाणित होता है। हर समझदार मानव सम्बंधों को पहचानता ही है जैसे माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नि। यह तीन संबंध स्पष्ट रहता ही है। माता-पिता का भी माता-पिता होना वांछित संभावित रहता ही है। उनका भी भाई-बहन होना स्वाभाविक है इस प्रकार वंशानुक्रम में अर्थात् संतान के अनन्तर पुनः संतान क्रम में ये सब संबंध स्पष्ट रहता ही है। इन्हीं को हम दादा-दादी चाचा-चाची आदि नामों से संबोधित किया करते है। इनमें प्रयोजनों को समझना ही समझदारी है, फलस्वरूप परिवार संतुलन होना सहज है। परिवार में ही न्याय का अपेक्षा बनी रहती है। यह अपेक्षाएँ पूरा होने के मूल में सम्बंधों को प्रयोजन के मूल में पहचान लेना उन सम्बंधों में निहित मूल्यों को निर्वाह करना।

माता-पिता के साथ संबंध निर्वाह परिवार का उद्देश्य समाधान समृद्धि के रूप में पहचान लिए रहते है। परस्पर व्यवहार में हर पुत्र-पुत्री सम्मान कृतज्ञता पूर्वक विश्वास निर्वाह करना बन पाता है। जबकि परस्पर परिवार के उद्देश्य के लिए कार्यकलाप बना रहता है और व्यवहार बना रहता है। व्यवहार की अभिव्यक्ति हर जागृत मानव में तन-मन-धन का अर्पण-समपर्ण सहित उत्पादन के लिए नियोजन कार्य सहित निर्वाह होना पाया जाता है। फलस्वरूप परिवार सहज समाधान समृद्धि निरंतर प्रमाणित होना स्पष्ट हो जाता है। इसी प्रकार भाई-बहन के परस्परता में भी परिवार सहज उद्देश्य ही प्रधान रहता है इसमें भागीदारी करना ही परिवार संतुलन का प्रमाण है। परिवार में भागीदारी करने वाले हर व्यक्ति में परस्पर और आगंतुक रूप में आये हुए लोगों के साथ जो समाधान समृद्धि का विश्वास सदा-सदा प्रमाणित होना ही परिवार संतुलन है।

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