(8) हर जागृत परिवार में हर मानव परस्परता में न्याय सहज निर्णयों को स्वीकार किये जाने, परस्पर आचरण में प्रमाणित करने के अर्थ में पहचानते है स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करते है इसकी आवश्यकता बना ही रहता है।
(9) परिवार में भागीदारी करता हुआ समझदार मानव परस्परता के संबंध, मूल्य, मूल्यांकन उभय तृप्ति स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करते है। इसकी अपेक्षा बना ही रहता है।
(10) हर जागृत परिवार में परस्पर मानव (नर-नारी) स्वीकृतियों अर्थात् समझदारियों कर्तव्यों के साथ स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करते है। यह हर मानव परिवार की आवश्यकता है।
(11) हर जागृत मानव परिवार में शिक्षा-संस्कार प्रयोजन प्रयोग, प्रमाणों को स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकित किया करता है यह परिवार संतुष्टि के लिए अति आवश्यक प्रक्रिया है।
(12) हर जागृत परिवार में कार्यरत नर-नारी मानवीय शिक्षा, मानवीयता को स्वीकार करने के रूप में संस्कारों को परीक्षण निरीक्षण किया करते है फलस्वरूप हर मानव संतान माननवीयता पूर्ण होने का अथवा जागृति पूर्ण होने का साक्ष्य प्रमाणित हो जाता है।
(13) हर जागृत मानव परिवार समाधान, समृद्धिता के फलस्वरूप उपकार कार्यों में प्रवृत्त होने के तथ्य को परिवार में मूल्यांकन होता है, स्वीकृत होता है और परस्पर परिवार में स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन और स्वीकृति और स्वीकृति होना पाया जाता है।
(14) हर जागृत मानव परिवार की परस्परता के परिवार में सुख, शांति, संतोष का मूल्यांकन तन, मन, धन रूपी अर्थ समृद्धि सदुपयोग सुरक्षा के अर्थ में स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करते है। इन प्रमाणों के साथ अखंड समाज सूत्र विकसित होना पाया जाता है।
(15) हर जागृत परिवार में व्यक्तित्व का मूल्यांकन समाधान और समृद्धि के अर्थ में स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकित होता है। परस्पर परिवार में वर्तमान में विश्वास का स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन होता है।
(16) हर जागृत परिवार में व्यवस्था में भागीदारी उपकार की सार्थकता, उत्सवित होने के क्रम में समग्र व्यवस्था में भागीदारी स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन होता है। फलस्वरूप समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व का स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन होता है।