(17) हर जागृत परिवार में नैसर्गिक सम्बंधों की पहचान बनी ही रहती है इसकी सार्थकता पूरकता ज्ञानावस्था के लिए और नैसर्गिकता के लिए सार्थक संतुलित, नियंत्रित, समाधानित होने का स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन होता है। यह सार्वभौम व्यवस्था अखंड समाज सूत्र के लिए एक आवश्यकीय कार्य है।

(18) हर जागृत परिवार एक परिवार समूह की प्रकृति प्रणाली, नीति और निर्णयों को स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करते है। यह समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व के अर्थ में सार्थक होने के परिणामों के अर्थ में हर परिवार संतुष्ट होता है। परिवार समूह के प्रति विश्वास वर्तमान होता है इसकी निरंतरता होती है।

(19) हर परिवार समूह अपने कार्य व्यवहार प्रवृत्ति प्रयोजनों को स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करता है और ग्राम परिवार का स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है।

(20) हर ग्राम परिवार समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व सार्थक होने की स्थिति में ग्राम परिवार समूह पर वर्तमान में विश्वास सुदृढ़ होता है, अक्षुण्ण होता है फलस्वरूप ग्राम परिवार मानसिकता के साथ सम्मिलित रहता है उत्सवित रहता है।

(21) हर ग्राम परिवार समूह क्षेत्र परिवार की प्रवृत्ति, कार्यकलाप, निष्ठा को श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करता है। समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व और व्यवस्था के पाँचों आयाम उसकी गति और सार्थकता का स्मृति, श्रुति पूर्वक मल्यांकित करता है उसके प्रवृत्ति की सार्वभौमता सहज मानसिकता सूत्र, व्याख्या, फल-परिणामों के आधार पर वर्तमान पर विश्वास करता है और उसे अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए निर्णय लेता है।

(22) हर जागृत क्षेत्र परिवार अपने आपको और मंडल परिवार को स्मृति, श्रुतिपूर्वक मूल्यांकित करता है उसकी प्रवृत्ति की सार्वभौमता प्रणाली पद्धति, नीति, फल- परिणाम सहज सार्वभौमता के आधार पर विश्वास को सुदृढ़ बनाता है उसे अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये निर्णय लेता है।

(23) हर मंडल परिवार अपने मंडल समूह का स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है मंडल समूह की प्रवृत्ति कार्यप्रणाली, नीतियाँ क्रियान्वयन किया रहता है। इन सबको सार्थकता के अर्थ में यथा समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व, सुख, शांति, संतोष के अर्थ में स्मृति श्रुति

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