पूर्वक मूल्यांकित करता है। इन सबके सार्वभौमता पर विश्वास करता है फलस्वरूप उसकी अक्षुण्णता के लिए तत्पर हो जाता है।
(24) हर मंडल समूह अपने को अपने कार्यकलाप नियति प्रयोजन फल के साक्षियों के आधार पर स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है और मुख्य राज्य परिवार को इन्हीं तथ्यों के आधार पर स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करता है। उसकी सार्वभौमता के आधार पर वर्तमान में विश्वास करता है उसको अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए निर्णय लेता है और निष्ठापूर्वक तत्पर हो जाता है।
(25) हर मुख्य राज्य परिवार एक प्रधान राज्य परिवार को उसके कार्यकलाप सार्वभौमता स्पष्टता मानव प्रयोजन, जीवन प्रयोजन और कार्य सुलभता, सुगमता के आधार पर और स्वयं को, स्वयं की सफलता के आधार पर स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है। सार्थकता के आधार पर विश्वास करता है उसे अक्षुण्ण बनाये रखता है।
(26) हर प्रधान राज्य परिवार एक विश्व राज्य परिवार को पहचानता है। उसके सार्थकता को व्यवस्था के पाँचों आयाम मानव सहज उभय लक्ष्य और गति का स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है और स्वयं के यथास्थिति को भी स्मृति श्रुति पूर्वक मूल्यांकन करता है फलस्वरूप सार्वभौमिता सार्थक हो जाता है। इस क्रम से विश्व परिवार राज्य तक अंतर्संबंध व्यवहार संबंध निष्कर्ष, जागृति और सार्थकता में भागीदारी हर परिवार संपन्न करता है। इसके अनंतर क्रम से इसके पहले भी इसके विलोम विधि से श्रुति पूर्वक मूल्यांकन होना पाया जाता है। जैसे परिवार, परिवार के हर सदस्यों का, परिवार समूह हर परिवार का, ग्राम परिवार सभी परिवार समूह का, ग्राम समूह सभी 10 ग्राम परिवार का, हर परिवार 10 ग्राम समूह परिवार का, हर मंडल परिवार 10 क्षेत्र परिवार का, हर मंडल समूह परिवार 10 मंडल परिवार का, हर मुख्य राज्य परिवार 10 मंडल समूह परिवार का, हर प्रधान राज्य परिवार 10 मुख्य राज्य परिवार का, विश्व राज्य परिवार सभी प्रधान राज्य परिवारों का मूल्यांकन करता ही है। समझदारी सार्थकता विधि पर स्मृति, श्रुति पूर्वक मूल्यांकित करता है।
सर्वमानव जागृत रहने की स्मृति से ऊपर चिन्हित किये गये परिवारों के स्वरूप में होता है। ऐसा परिवार व्यवस्था में भागीदारी कर पाता है। इसलिए गांव या मोहल्ला में कम से कम 100 परिवार व्यवस्था के रूप में प्रमाणित होने की स्थिति में ग्राम परिवार या मोहल्ला परिवार की व्यवस्था साकार होना सहज है। व्यवस्था के साकार होने का तात्पर्य न्याय सुलभता व विनियम सुलभता व उत्पादन सुलभता स्वास्थ्य-संयम सुलभता, मानवीय शिक्षा-संस्कार सुलभता होने