है। जागृति अस्तित्व सहज अभिव्यक्ति है। इस प्रकार भक्ति की संभावना, सुलभता सबके लिए समीचीन है।
मन में ही भक्ति की अभिव्यक्ति होना स्पष्ट हो चुका है। यह सम्पूर्ण ज्ञानेन्द्रियों को जीवन्त बनाए रखने का कार्य सम्पन्न किए रहता है। यह प्रत्येक मानव में पाया जाने वाला प्रमाण है। ऐसे जीवन्त मानव ही जागृति के लिए स्रोत हैं। इसलिए प्रत्येक मानव विश्वास पूर्वक जीना ही चाहता है। विश्वास को मूल्यों के क्रम में जानना, मानना, सम्बंधों को पहचानना व निर्वाह करना सरल, सुंदर, समाधान और इसकी निरंतरता है। इसका प्रमाण - शिशु काल में प्रत्येक मानव संतान विश्वास के अलावा कुछ करता ही नहीं। परम्परा में विश्वास सहज धारक वाहकता प्रमाणित होने के उपरान्त परम्परा में आए (अथवा अवतरित) सभी मानव संतान, शिशु काल की विश्वास निष्ठा को जागृत परम्परा सहज रूप में ही अपनाए रखते हैं। इसका मार्ग प्रशस्त हो जाता है। इसीलिए मानव परम्परा में मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान की आवश्यकता मूल्यांकित हो पाती है।
मानव के अपने स्वत्व रूपी मानवीयता में न्याय दृष्टि की क्रियाशीलता सहज होती है। भक्ति और निष्ठा की तन्मयता नित्य उत्सव के रूप में सफल होने का आधार बिंदु है। भक्ति सहज निष्ठा में न्याय सुलभता एक सहज क्रिया है। न्याय सुलभता ही विश्वास और अभय के रूप में सार्थक है। विश्वास के साथ ही सर्वतोमुखी समाधान रूपी अभ्युदय परम्परा में प्रमाणित होता है। इसी क्रम में मानव में निष्ठा उसकी संभावना, सार्थकता, निरंतर उदयशील होना पाया जाता है। सम्पूर्ण जागृति में न्याय, धर्म, सत्य दृष्टियाँ क्रियाशील होती हैं इस आधार पर भयमुक्ति (अर्थात् विश्वास और उसकी निरंतरता, समाधान,समृद्धि, अभय सहअस्तित्व) सहज रूप में प्रमाणित होती है। फलस्वरूप भक्ति व्यवहारिक हो जाती है।
भक्ति को इस प्रकार से भी देखा जाना सहज है कि मानवीयता पूर्ण विधि से जीने की कला ही भक्ति है अथवा भक्ति के वैभव के रूप में स्पष्ट है। जागृति विधि से मानव में भक्ति सहज क्रियाकलाप है क्योंकि व्यवहार में सामाजिक (धार्मिक), व्यवसाय में स्वावलम्बन के उपरान्त ही भक्ति की अभिव्यक्ति प्रारंभ होती है। भक्ति स्वयं में जागृत मानव सहज व्यवहार और कार्य है। मानवीयता पूर्ण मानव परम्परा में भय सर्वथा तिरोहित हो जाता है क्योंकि भय स्वयं भ्रम से, के,लिए ही उत्पीड़ित किया रहता है। इसके मूल में पराभव के बाद पराभव ही है। भ्रम मुक्ति के उपरान्त मानव सामाजिक होता है - समृद्ध, अभय सम्पन्न अथवा विश्वास में निष्ठा सम्पन्न होता