है। सर्वतोमुखी समाधान सहित प्रामाणिकताओं को प्रमाणित करने का क्रम स्वयं स्फूर्त विधि से चरितार्थ होता है। इसी आधार पर भक्तिपूर्वक मानव हर क्षण, हर पल, उत्सवित रहता ही है। भक्ति जागृति सहज उत्सव ही है। उसमें अभयता अर्थात वर्तमान में विश्वास तन्मयता का प्रमाण है। विश्वास पूर्वक ही अभयता प्रमाणित होती है। इस कारण विश्वास में तन्मयता और प्रमाणिकता में तन्मयता स्वाभाविक तथ्य होता है। इसीलिए जागृत मानव परम्परा में एक मात्र भक्ति ही नित्य उत्सव है। अस्तु, तन्मयता का सार्वभौम प्रयोजन विश्वास और उसकी निरंतरता की सार्थकता का सर्वविदित होना है। इस आधार पर भक्ति सबके लिए आवश्यक अभिव्यक्ति है, सर्वोपरि श्रेष्ठ समाज और सामाजिकता का प्रमाण है।
3. ममता 4. उदारता
ममता :- (1) अपनत्व की पराकाष्ठा पूर्वक पोषण-संरक्षण कार्य। (2) स्वयं की प्रतिरूपता की स्वीकृति उसकी निरंतरता।
उदारता :- (1) स्व प्रसन्नता पूर्वक दूसरों की जीवन जागृति, शरीर स्वस्थता व समृद्धि के लिए आवश्यकता अनुसार तन, मन, धन रूपी अर्थ का अर्पण-समपर्ण करना। (2) प्राप्त समाधान रूपी सुख सुविधाओं (समृद्धि) का दूसरों के लिए सदुपयोग करना और प्रसन्न होना।
ममता की परिभाषा, सूत्र और व्याख्या ममत्व के (मेरापन) आधार पर ही हो पाती है। यह मन में होने वाली अनुभवमूलक प्रमाण के आधार पर कल्पनाशीलता (व्यवहारिक तरीकों) को संयत कर पाता है। यह शिशुकाल में सर्वाधिक रूप में माता-पिता के चरित्र में अथवा अभिभावकों के चरित्र में दिखने वाला तथ्य है। यह सामान्यतः प्रचलित अभिव्यक्ति है। ऐसी मान्यताएँ पूर्वानुक्रम, परानुक्रम भेद से पाई जाती हैं। पूर्वानुक्रम पद्धति प्रणाली मानवीयता पूर्ण विचार-चिंतन-बोध-अवधारणा और अनुभव मूलक होने के क्रम में अध्ययनगम्य है। परानुक्रम मान्यता का स्रोत शरीरमूलक एवं जीवजगत से प्राप्त प्रेरणाओं के रूप में है। अर्थात् इंद्रिय संनिकर्षपूर्वक मान्यताएँ होती हैं। वे सब प्रिय, हित, लाभात्मक हैं। तुलन विश्लेषण संबधों के अधार पर संयत होना पाया जाता हैं। संयत होने का तात्पर्य प्रिय हित लाभ प्रवृत्तियां न्याय, धर्म, सत्य संगत होने से है। पूर्वानुक्रम विधि से चिंतन, समाधान और संबंध, मूल्य-मूल्यांकन के रूप में प्रामाणिकता के प्रभाव क्षेत्र के अनुरूप मान्यताओं को मन स्थापित कर लेता है अथवा मान जाता है। पूर्वानुक्रम प्रणाली से प्राप्त मान्यताएँ जीवन सहज क्रियाओं का (यह भी जागृति पूर्ण क्रियाओं