सम्बन्धों की पहचान परम्परा सहज है। भले ही मानव अभी तक अन्तर्द्वन्दों सहित समुदाय चेतना में ग्रसित है फिर भी सम्बन्धों को पहचानने का प्रयास नैसर्गिक रूप में उभरते आया है, इच्छुक है ही। अन्तर्द्वन्दों और समुदायों की परस्परता में, घृणा उपेक्षा की ध्वनि व मुद्राएं समावेशित होने के फलस्वरूप सम्बन्धों के प्रति निष्ठा स्थिर नहीं हो पाई। फलत: मूल्यों का अकाल नासमझी के रूप में त्रस्त करते ही आया। इस समीक्षा से यह पता चलता है कि मानव सम्बन्धों में निष्ठान्वित होने के लिए, समाज को ही पहचानना आवश्यक है। इसी विधि से विश्व परिवार सम्बन्ध भी है। एक परिवार को पाँचों आयाम सम्बंधी क्रिया-कलाप में भागीदारी करना अनिवार्य है। पांचों आयाम को ऊपर वर्णित कर चुके हैं तालिका निम्न है।
यह कहे गये सभी स्तरीय 10 संख्यात्मक परिवार से, विश्व परिवार तक आवश्यकता है ही। यह तथ्य भली प्रकार से समझ में आता है। - अ.श. 58–60