समझदार परिवार विधि से व्यवस्था सफल

सर्वशुभ का स्वरूप हर मानव परिवार में प्रत्येक नर-नारी समझदारी से सम्पन्न होना एवं समाधान समृद्घि को प्रमाणित करना है। इस विधि से समृद्घि व्यवस्था का परिणाम है। व्यवस्था पूर्वक श्रम नियोजन, श्रम नियोजन पूर्वक उत्पादन, उत्पादन के आधार पर समृद्घ होना देखा गया है। इसी प्रकार से हर परिवार को प्रमाणित होना आवश्यक है। पहले मंजिल के रूप में हर परिवार ही अपने वैभव का प्रमाण है। इसका स्वरूप समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी, भागीदारी, समाधान समृद्घि है।

इस क्रम से जीने, समझने, प्रमाणित होने के संयुक्त स्वरूप को परिवारमूलक स्वराज्य व्यवस्था नाम दिया है।

व्यवस्था का द्वितीय सोपान परिवार समूह सभा है। इसमें 10 परिवार से निर्वाचित एक एक सदस्य एकत्रित होगें। एक दूसरे की पहचान जागृत परिवार विधि से सम्पन्न रहती ही है। इनमें नर नारी एक परिवार होते हैं। इनमें प्रतिबद्घता का स्वरूप यही रहेगा 10 परिवारों में सन्तुलन को बनाए रखना। 10 परिवार में सन्तुलन का मतलब 10 परिवारों की परस्परता में न्याय पूर्वक जीने की कला को उजवल बनाना। 10 परिवारों की परस्परता में पूरकता को बनाए रखना। ये दो प्रधान कार्य हैं। इसी क्रम में 10 परिवार में हस्त शिल्प, ग्राम शिल्प, कविता साहित्य, चित्रकला कृषि एवम कुटीर उद्योग में प्रोत्साहन बनाए रखना है। इनमें ऐसी कलाओं के निखरने के लिए उपायों को सोचना, संयोजित करना यह कार्यक्रम रहेगा। इस प्रकार 10 परिवारों का सौभाग्य का निखार हर दिन, महीना, वर्ष, श्रेष्ठता की ओर शोध होना स्वाभाविक रहेगा। यह दूसरे सोपान का वैभव हुआ। इस प्रकार के कार्य के फलन में दसों परिवारों का संयुक्त देन बनी रहेगी। इसमें दसों व्यक्ति कार्यरत रहेंगे सोचेंगे। हर आयुवर्ग के लिए परिवार सूत्रों से सूत्रित रहने का कार्यक्रम बनाए रखेंगे। अपने अपने परिवार में समृद्घि के प्रमाण रूप में समाजगति के दूसरे सोपान सौभाग्य में भागीदारी करेंगे। - ज.व. 195–198

सभी परिवार व्यवस्था में पारंगत

दसों परिवार संस्कृति सभ्यता में एक रूपता को बनाए रखेंगे। कला और उत्पादन क्रियाओं के प्रोत्साहन से अपनी अपनी पहचान बनाए रखने में सतत स्वयं स्फूर्त विधि से सम्पन्न होते जायेंगे। इस स्वायत्ता को पहचानने के उपरान्त सम्मिलित व्यवस्था दस परिवार में समाधान, समृद्घि का अनुभव होना, प्रमाणित होना, गवाहित होना बन जाता है। यही परिवार समूह सभा का वैभव होना पाया जाता है। इस वैभव के साथ यह भी स्वयं स्फूर्त होता है इसकी विशालता की आवश्यकता है। जैसे परिवार में परिवार समूह व्यवस्था की प्रवृत्ति स्वयं स्फूर्त होती है। इसी प्रकार परिवार समूह सभा ग्राम परिवार की विशालता दस के गुणन में होते हुए ग्राम सौभाग्य को प्रमाणित करने का उद्देश्य बन जाता है। क्योंकि समूचे ग्राम में कम से कम 10 परिवार समूह सभा से निर्वाचित सदस्य होंगी। दस परिवार सभा अपना सौभाग्य प्रमाणित किये रहना स्वाभाविक रहता है। इन आधारों पर हर परिवार समूह सभा से एक एक व्यक्ति का निर्वाचन होना सहज हो जाता है।

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