सर्वशुभ और उसकी प्रतिष्ठा सर्वसुलभ रूप में तभी संभव होना देखा गया है कि हर बच्चे-बड़े जागृति को प्रमाणित कर दे। ऐसी लोकव्यापीकृत जागृति, लोक व्यापीकृत सर्वशुभ प्रमाण योग्य जागृति, जागृत परंपरा में, से, के लिये होना भी सुस्पष्ट हो चुकी है। जागृत जीवन में मध्यस्थ क्रिया, मध्यस्थ शक्ति, मध्यस्थ बल के स्वरूप को समझने की विधि सहित उसका कार्य, कार्य-स्वरूप और प्रयोजनों को ज्ञात कर लेना आवश्यक है। यही शिक्षा-संस्कार का प्रयोजन है। इससे लोकव्यापीकरण कार्यक्रम में सहज गति सुलभ होगा ही। – आ.व. 92-94
(3) विनिमय व्यवस्था - श्रम मूल्य, श्रम विनिमय सिद्धांत
हर मानव में श्रम शक्तियाँ जीवन और शरीर के संयुक्त रूप में नियोजित होना देखा जाता है। संपूर्ण उत्पादन का उद्देश्य महत्वाकांक्षा सामान्य आकांक्षा की वस्तुओं के स्वरूप में देखा जाता है। उत्पादित हर वस्तु आदिकाल से अभी तक समान रूप में उपयोगी होना पाया जाता है। जैसे आहार वस्तुएं आदिकाल से अभी तक क्षुधानिवृत्ति के उपयोग में प्रायोजित होना प्रमाणित है। आवासीय वस्तुएं आदिकाल से शरीर संरक्षण के अर्थ में उपयोगी रहा है। अभी भी उतना वैसा ही उपयोगी होना देखने को मिलता है। अलंकार वस्तुएं आदिकाल से जैसा शरीर संरक्षण और प्रसाधनों के प्रयोजन में प्रायोजित होता रहा है वैसे आज भी उपयोगी होना देखा जाता है। - स.श. 243
यह सर्वमानव अपेक्षा होने के तथ्य को इस प्रकार सर्वेक्षण कर सकते हैं कि किसी भी वस्तु को उसके उपयोगिता के आधार पर श्रम मूल्य का मूल्यांकन करना चाहिए या पत्र मुद्रा के आधार पर करना चाहिए?
- उपयोगिता को अर्थात् सामान्यकांक्षा, महत्वाकांक्षा संबंधी उपयोगिता को वस्तुओं में पहचाना जा सकता है। कागज को छापकर ढेर करने से क्या पहचाना जा सकता है ?
- संपूर्ण आवश्यकताएँ वस्तु व उसकी उपयोगिता के आधार पर उपयोगी होता है या ढेर सारे प्रतीक मुद्रा, पत्र मुद्रा से ? इसका उत्तर क्या होगा अपने में, से हर व्यक्ति उत्तर देकर देखे वही सबका उत्तर है। इसीलिये मानव उपयोगिता और सुन्दरता को स्थापित करने में, से, के लिये हर व्यक्ति स्वतंत्र होना मौलिक अधिकार है। इसी आधार पर हर परिवार में समृद्घि की संभावना समीचीन रहता ही है। - स.श. 244–245
- (*अर्थात्),
श्रम मूल्य के आधार पर विनिमय-कोष कार्यक्रम परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था का अंगभूत होना; जीवन जागृति पूर्ण विधि का ही अभिव्यक्ति है।
- जीवन जागृति पूर्वक ही श्रम मूल्य का मूल्यांकन हर उत्पादित वस्तुओं का उपयोगिता, कला मूल्य के आधार पर निर्धारित होता है।
- श्रम नियोजन श्रम विनिमय प्रणाली में प्रतीक वस्तुओं या मूल्यों का दखलांदाजी बनाम हस्तक्षेप नहीं होती। दूसरे विधि से इसकी आवश्यकता ही शून्य हो जाती है।
- प्रतीक मुद्रा में भ्रमित मानव का कल्पना भ्रमपूर्वक किया गया सभी निर्णय स्थिर नहीं हो पाते इसीलिये प्रतीक मुद्रा और वस्तु का मूल्य ही अस्थिर हो जाता है।