भंगिमा, अंगहारों की अभिव्यक्ति है। गौरव क्रियाकलाप में सार्थकता की स्वीकृतियाँ सर्वाधिक प्रभावशील रहती हैं। फलस्वरूप सरलता सहज ही सम्यक होती है।

अस्तु, श्रेष्ठता मानव के जीवन जागृति पूर्वक में होने वाली अभिव्यक्ति है। श्रेष्ठता प्रत्येक मानव को स्वीकार्य है। श्रेष्ठता की अभिव्यक्ति में सरलता पूर्वक सम्मानित करना पाया जाता है। जागृति पूर्वक ही मानव पद प्रतिष्ठा प्रमाणित होता है। देव मानव का सम्मान करता है और देव मानव दिव्यमानव का सम्मान करता है। दिव्य मानव देव मानव का मूल्यांकन करता है। देव मानव मानव का मूल्यांकन करता है। मानव मानव का मूल्यांकन करता है। देव मानव देव मानव का मूल्यांकन करता है। दिव्यमानव दिव्यमानव का मूल्यांकन करता है। इस प्रकार से परस्पर सम्मान करना सम्मान पाना सहज हो जाता है और सम्मान परम्परा बनी रहती है। यह मानव परम्परा में अक्षुण्ण होता है। इसका परिवार, ग्राम, मुहल्ला से चलकर विश्व परिवार व्यवस्था तक अनुभव किया जाना जीवन जागृति सहज भव्यता है।

19. विश्वास 20. सौजन्यता

विश्वास :- (1) परस्परता में निहित मूल्य निर्वाह। (2) व्यवस्था की समझ, समाधान की अभिव्यक्ति और संप्रेषणा।

सौजन्यता :- (1) सहकारिता, सहभागिता, सहयोगिता, पूरकता। (2) पूरकता विधि से ही विश्वास सहज प्रमाण संपन्न होता है। पूरकता हर परस्परता में समीचीन है। मानव सहज परस्परता, नैसर्गिकता सहज परस्परता नित्य विद्यमान है। रासायनिक रचनाओं में विकास का अभिप्राय है। मानव की पहचान शरीर व जीवन के संयुक्त रूप में होना स्पष्ट हो चुकी है। जिसमें से शरीर के संबध में विकास, जीवन के संबध में जागृति अपेक्षित है। कुछ स्थानों पर विकास शब्द से शरीर व जीवन का संयुक्त तात्पर्य भी है। विश्वास मूलतः स्वयं में, से, के लिए होना अनिवार्य स्थिति है। (3) स्वयं में विश्वास होना ही सौजन्यता पूर्ण अभिव्यक्ति है। सौजन्यता अपने आप में सुहृदय सूत्र से अनुप्राणित प्रस्तुति है। (सुहृदय का तात्पर्य मानवीय लक्ष्यों, विचारों, व्यवहार और कार्य मानसिकता और कार्यक्रम से है।) सेवा, अर्पण, समर्पण, जिज्ञासा और स्वीकृतियाँ हैं।

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