है। यह जीवन जागृति पूर्वक वर्तमान सहज है। यही विश्व परिवार का सहज रूप और अखंड समाज का सहज रूप है। परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था मानव धर्म का प्रमाण है। मानव धर्म सहज अभिव्यक्ति ही समाज न्याय का स्रोत है। विश्व परिवार ही अखंड समाज है।

फलस्वरूप परिवार का पहचानना परिभाषित है। परिवार में समाहित व्यक्ति में परस्पर संबंधों को पहचानना और मूल्यों को निर्वाह करना एक अनवरत उत्सव सहज क्रिया है। मानवीयता पूर्ण आचरण सहज व्यक्ति समाज न्याय अथवा लोक न्याय के रूप में सार्थक है। अस्तु, व्यवस्था ही सर्वतोमुखी समाधान (अभ्युदय) है। इससे समाज में लोक न्याय और सुख है। इस प्रकार अभ्युदय व्यवस्था क्रम में सर्वतोमुखी समाधान होना; समाधान ही व्यवहार में न्याय सहज और सुख, शांति, संतोष का अनुभव होना उसकी निरंतरता परम्परा रहना ही मानव परम्परा की मौलिकता है। अस्तु, मानव धर्म पूर्ण (सर्वतोमुखी समाधान सम्पन्न) परम्परा ही मानव परम्परा है।

अस्तित्व में मानव परम्परा की एक सहज गति है। यह मानवीय शिक्षा सहअस्तित्व सहज जीवन विद्या व वस्तु विद्या (वस्तु विद्या रासायनिक भौतिक क्रियाकलापों के रूप में प्रमाणित है) से परिपूर्ण मानवीय संस्कार (संबंधों व मूल्यों की पहचान व निर्वाह) परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था है और मानवीयता पूर्ण आचार संहिता रूपी संविधान है। ऐसी मानव परम्परा में प्रत्येक मानव परिवार में और परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था में भागीदारी सम्पन्न होता है। यही मानव परम्परा अस्तित्व में सहज वर्तमान प्रभावी होता है। अस्तित्व में जीवावस्था, प्राणावस्था व पदार्थावस्था में भी सहज परम्परा है। सहज परम्परा का तात्पर्य नियमित, नियंत्रित, सन्तुलित रूप में होने से है जिसका प्रमाण प्रत्येक एक अपने “त्व” सहित व्यवस्था और समग्र व्यवस्था में भागीदारी से है। यह ही सहअस्तित्व में होने का प्रमाण है। इस प्रकार सत्य, नित्य वर्तमान रूपी सहअस्तित्व है। यही शाश्वत धर्म है। ज्ञानावस्था में होने के कारण अस्तित्व सहज विधि से जागृति पूर्वक मानव दृष्टा पद प्रतिष्ठा में है। दृष्टा पद सहज रूप में अस्तित्व को जानना-मानना समीचीन है। इससे मानव का प्रमाणित होना ही सत्य दृष्टा,कर्ता, भोक्ता होने का प्रमाण है। साथ ही मानव द्वारा ही अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था को पहचानना, निर्वाह करना जागृति सहज अभिव्यक्ति है। यही मानव धर्म परायण होने का प्रमाण है। मानवता ही मानव धर्म है। मानवत्व सर्व मानव में, से, के लिए समान वस्तु है व्यवहार है और महिमा प्रयोजन है। मानव धर्म जागृति

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