देखा जाता है। यही सब मानव से मान्य काल का प्रयोजन है। इन सबकी अवधित कार्य की निरंतरता से नित्य वर्तमान स्पष्ट होता है।
अस्तित्व नित्य वर्तमान होने के कारण वर्तमान अक्षुण्ण सहज है इसलिए इसका काल खंड संभव नहीं है। मानव सहज कल्पनाशीलता का प्रयोग करने के उपरान्त ही वर्तमान समझ में आता है साथ ही कल्पना का सम्पूर्ण आधार और प्रेरणा अस्तित्व और वर्तमान ही है। अस्तित्व सहज सहअस्तित्व होना ही विकास, जीवन, जीवन जागृति, पूरकता, उदात्तीकरण, रचना व विरचानाएँ सतत वर्तमान हैं। कितने भी विखंडन के उपरान्त एक का बने रहना वर्तमान रहता है। समग्र अस्तित्व का भाग पूर्वक मानव जितना भी प्रयत्न करे, प्रत्येक “एक” अस्तित्व में अविभाज्य होना प्रमाणित है। सम्पूर्ण अस्तित्व सत्ता में संपृक्त सहज अस्तित्व होना वर्तमान है। सत्ता स्थितिपूर्ण व्यापक है सत्ता में संपृक्त अनंत एक एक प्रकृति है। मानव कितना भी नापे और नापने की वस्तु समीचीन रहती ही है। और कितना भी गिने पुनः गिनने के लिए वस्तु समीचीन रहती ही है। इसलिए अस्तित्व व्यापक, अनंत के रूप में वर्तमान है। अस्तु अस्तित्व अविरत वर्तमान है। सम्पूर्ण भावों का होना वर्तमान सहज महिमा है। वास्तविकता, यथार्थता व सत्यता, स्थिति सत्य, वस्तु स्थिति सत्य, वस्तुगत सत्य सहज रूप में जानने-मानने, पहचानने-निर्वाह करने के रूप में है। प्रत्येक एक का अपने रूप, गुण, स्वभाव, धर्म सहज अविभाज्यता ही भाव है। भाव सहजता भी वर्तमान में होना ही है। सत्तामयता ही अस्तित्व में स्थिरता सहज भाव है और सत्ता में संपृक्त प्रकृति विकास और जागृति सहज निश्चयता का प्रमाण है। सत्ता का व्यापक होना स्थिरता का और सत्ता में संपृक्त प्रकृति विविधता सहित जागृति रूप में विकास में निश्चयता का प्रमाण नित्य वर्तमान है। ऐसी स्थिरता निश्चयता सहज वर्तमान है। यह मानव संचेतना जीवन जागृति दृष्टा पद वैभव का सहज प्रमाण है।
मानव संचेतना व यांत्रिकता एवं यंत्र सहज प्रामाणिकता, जागृति व जागृति क्रम में होने वाला प्रमाण व प्रामाणिकता है। यन्त्रवाद के क्रम में मानव द्वारा क्रिया की अवधि के रूप में काल गणना सहज हुई है। जो आवश्यक रहा है। इस प्रकार जागृत मानव अस्तित्व सहज जागृति के रूप में वर्तमान है। जो जागृति सम्पन्न जीवन संचेतना का प्रमाण है। यन्त्रों का संधान-अनुसंधान मानव सहज जागृति क्रम में संभावित है। इसी क्रम में मानव क्रिया की अवधि को काल मान लेता है जो यांत्रिकी गणित ग्राही है।