कला :- उपयोगिता एवं कला की संयुक्त उपलब्धि (प्रकाशन) एवं योग्यता मेधा जीवन क्रियाओं में से विज्ञान व विवेक सम्मत साक्षात्कार सहित स्वीकार सहज क्रिया है। विवेक अपने में प्रयोजनों को जानने-मानने, पहचानने-निर्वाह करने के रूप में प्रमाणित है। मानव में, से, के लिए प्रयोजन-सूत्र अथवा जागृत विवेक सूत्र यह है :- (1) जीवन का अमरत्व, शरीर का नश्वरत्व, व्यवहार के नियम साक्षात्कार पूर्वक स्वीकृति ही विवेक है। विज्ञान विधि से काल सहज स्वीकृति क्रिया सहज स्वीकृति निर्णय सहज स्वीकृत प्रमाणित करने की विधियाँ। इसकी प्रक्रिया विश्लेषणात्मक है। विश्लेषण प्रणाली से, भाग-विभागों से रचित रचनाओं के रूप में पहचानने का क्रियाकलाप है। जबकि विवेक पूर्णता और संपूर्णता के साक्षात्कार सहित न्याय, धर्म, सत्य के आधार पर सम्पूर्ण प्रयोजनों को पहचानने की क्रिया है जो निर्वाह करने की मूल प्रकृति है। प्रयोजन सम्मत विश्लेषण सार्थक होता है और विश्लेषण सम्मत प्रयोजन सार्थक होता है। सत्य, समाधान, न्याय सम्मत विश्लेषण की स्थिति में विज्ञान विवेक सम्मत होना पाया गया है फलस्वरूप व्यवहार में प्रमाणित होता है।
विवेक की रौशनी में विज्ञान को मूल्यांकन करने की स्थिति में अभी तक जो भी विज्ञान मानसिकता है वह मानवता विरोधी होना पाया जाता है क्योंकि विज्ञान सूक्ष्मतम अध्ययन के पश्चात अस्तित्व में जो कुछ भी है पूर्णतः अनिश्चित, अस्थिर बताया जाता है। जबकि अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित विधि से विवेक पूर्वक परिशीलन करने पर पता चला है अस्तित्व स्थिर है विकास और जागृति निश्चित है। अतएव विज्ञान विवेक सम्मत होने की आवश्यकता विधि में व्यवहार प्रमाणों में प्रमाणित होना आवश्यक है।
ऐसा विकास प्रकारान्तर से आशा आकाँक्षा के रूप में व्यक्त होते रहा है व जागृति विधि, सत्य, धर्म, न्याय, दृष्टि से संप्रेषित प्रमाण सम्पन्न होना पाया जाता है। इनका लोकव्यापीकरण कार्य में दूरसंचार कला सहायक सार्थक होता है। आशा आकाँक्षाएं प्रमाण का आधार न होने के आधार पर प्रयोजनों का सूत्र सम्मत नहीं हो पाया यही रिक्तता अनेकानेक भ्रम मूलक दुष्कर्म, दुष्ट कर्म को गतित करने के लिए विज्ञान सहायक हो गया जबकि वांछनीयता रही कि सत्कार्य सत्य सहज प्रयोजनों को पोषण और संरक्षण करने के लिए गति की आवश्यकता रही। सम्पूर्ण विज्ञान विधि से सकारात्मक पक्ष में दूर संचार उपलब्धि है। आहार, आवास, अलंकार सामग्रियों में संयोजन क्रियान्वयन कार्यकलाप में भी गति प्रमाणित हुई है। जैसे स्वचालित यंत्रों से उत्पादन। अतएव विज्ञान विवेक सम्मत होने की स्थिति में सम्पूर्ण दूरसंचार मानवीयता के पोषण-संरक्षण में होना