व्याख्या और निष्कर्षों की निष्पति है। सार्थकता के अर्थ में सुनियोजित होना पाया जाता है। इसलिए सुनिश्चित भी होता है।

संबंधों का स्वीकार सहित जीने का क्रम मानवीय शिक्षा-संस्कार पूर्वक ही स्पष्ट और स्वीकार हो पाता है फलतः निष्ठा होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। मानव परम्परा की जागृति का पहला स्वरूप शिक्षा-संस्कार ही है। यह विज्ञान क्रम विधि उपक्रम पूर्वक जड़-चैतन्य प्रकृति का अध्ययन करना आवश्यक है। प्रधानतः चैतन्य प्रकृति का अध्ययन करना विज्ञान संसार में रिक्त रहा है। अभी इसको सुगम रूप में समझना बनता है। विज्ञान संसार परमाणु सहज ज्ञानार्जन अथवा भाषा दावा के रूप में प्रस्तुत करता ही है। इसलिए विज्ञानियों को गठनपूर्ण परमाणु को स्वीकारने में कोई बाधा दिखाई नहीं पड़ती। बाधा एक ही है कि दुष्ट सामरिकता के लिए तरफदारी जिसके आधार पर आजीविका बिताता हुआ अनेकानेक विज्ञानी कहलाने वाले मेघावियों को तकलीफ हो सकता है क्योंकि गठनपूर्ण परमाणु के आधार पर जागृति तूल पकड़ना आता ही है और परमाणु सहज वैभव सम्पूर्ण जड़-चैतन्य प्रकृति सहज व्यवस्था का मूलरूप होना प्रतिपादित हो जाता है।

व्यवस्था सहज विधियों को, निश्चयन सहज विधियों को, स्थिर सहज विधियों को आवश्यकता के रूप में स्वीकारने की स्थिति में विज्ञानी सामाजिक चेतना में और जीवन जागृति और उसके प्रमाणीकरण क्रियाकलाप में विधिवत भागीदारी कर सकते है। काल क्रम संयोग प्रकृति जहाँ भी विज्ञान मानसिकता अपने को अतिमहत्वपूर्ण मानता है उसमें से दूरसंचार कार्य, कार्य योजना, तकनीकी मानव कुल के लिए सार्थक है अन्य सभी निरर्थक सिद्ध हो चुका है। जैसे बीजगुणन इसकी स्थिरता होती नहीं है। नस्ल सुधार जिसकी स्थिरता होती नहीं है। कृत्रिम खाद धरती को बर्बाद विषाक्त करता है कीटनाशक खाद्य को विषाक्त बनाता है। खनिज तेल और कोयला धरती के वातावरण को क्षतिग्रस्त कर चुका है।

अस्तु, सामाजिक ज्ञान विवेक व्यवहार तंत्र जागृति प्रमाण सूत्रित होने के लिए आवश्यकता महसूस होने की स्थिति में चैतन्य पक्ष को समझने की आवश्यकता समीचीन है ही क्योंकि शरीर रचना विधि क्रम में मानव विश्लेषित नहीं हो पाया।

अस्तित्व मूलक मानव-केन्द्रित चिंतन ज्ञान के अनुसार अस्तित्व में विकास क्रम में रासायनिक-भौतिक रचनाएं-विरचनाएँ स्पष्ट होती है। परमाणु विकास पूर्ण (गठनपूर्ण) होने के उपरान्त चैतन्य पद में संक्रमित होता है यह समझ में आता है। ऐसी चैतन्य इकाई का जीवन पद में होना

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