यह तथ्य स्पष्ट हो चुका है कि अस्तित्व में भौतिक-रासायनिक और जीवन क्रिया ही सम्पूर्ण क्रिया का मूल रूप है। इनमें से भौतिक क्रियाकलाप के मूल में परमाणुओं का कार्यरत रहना, रासायनिक क्रियाकलाप के मूल में परमाणु का कार्यरत रहना और जीवन क्रियाकलाप में भी मूलतः गठन पूर्ण परमाणु का होना स्पष्ट है यह स्पष्ट क्रियाकलाप बच्चे, युवा, वृद्ध, सभी को समझ में आता है। परमाणु भले सबको समझ में आये या न आये। भौतिक क्रियाकलाप अलग, रासायनिक क्रियाकलाप अलग, जीवन क्रियाकलाप अलग स्पष्ट हो जाता है। यद्यपि इन सब क्रियाकलाप को पहचानने वाला जीवन ही है। ये सब अलग-अलग रहते हुए साथ-साथ होना ही सहअस्तित्व का साक्षी है।
जीवन जागृति पूर्वक ही सूक्ष्म व सूक्ष्मतम कांति को अर्थात् प्रकाशन को पहचानता है। यह सबको समझ में आता है कि जड़-चैतन्य प्रकृति व्यापक वस्तु में नित्य वर्तमान और प्रकाशमान है। व्यापक वस्तु सहज प्रकाशमानता, पारगामी, पारदर्शिता के रूप में समझ में आता है। यह पारदर्शिता, पारगम्यता स्वयं में अतुल्य महिमा है। यह व्यापक वस्तु सहज कांति है। व्यापकता का कोई आयाम नहीं हो पाता क्योंकि व्यापक वस्तु कितना लंबा चौड़ा है इसको मानव निर्मित किसी भी मापदंड, धन, ऋणात्मक गणित विधि से अर्थात् जोड़-घटाने की संख्यात्मक रूप में निर्धारित नहीं कर सकते यह अवश्य अनुभव किया गया है कि जितने भी अनुभव क्षेत्र में, कल्पना क्षेत्र में है उससे अधिक व्यापक वस्तु है ही। कल्पना भी हम वर्षों करें और-और विधि से करे अंततोगत्वा कल्पना के विस्तार से अधिक होने की गवाही कल्पना को भी मिलती है अनुभव को भी मिलती है कार्य व्यवहार में जब जितने भी पहुंच या दौड़ हो पाता है वह कल्पना क्षेत्र के एक छोटे भाग में सिमटा रहता है। हमारी कल्पना और अनुभव सर्वाधिक विशाल, सर्वाधिक गति के रूप में पहचाना गया है। मानव का कार्यगति कार्य की सीमा सदा गणितीय गति से कम होता ही है।
जैसे प्रकाश की गति, विद्युत गति के बारे में गणित अपने निष्कर्षों को निकालता है। इसी प्रकार धरती की गति, परमाणु की गति भी निष्कर्ष गणित द्वारा निकाल लेते है। प्रकाश गति का दृष्ट प्रमाण संख्या क्रम में स्पष्ट होना अभी भी विचाराधीन है ही। प्रकाशगति के आधार पर अथवा प्रकाश गति के अनुरूप किसी वस्तु का गति होने पर वह वस्तु अक्षय होने का दावा है। यदि यह सच्चाई है तब प्रकाशगति निरंतर स्वयं निरंतर विद्यमान गतिमान रहना ही था। ऐसा कुछ देखने