सर्वमंगलमयता प्रेमानुभूति उसका प्रमाणीकरण प्रवृत्ति में ही है। बौद्धिक समाधान, भौतिक समृद्धि,अभय, सहअस्तित्व सहज प्रमाण ही सर्व मंगलमयता का प्रत्यक्ष रूप है। प्रेमानुभूति में तन, मन, धन का सुदपयोग, सुरक्षा होती ही है। मानव संचेतना सहज कार्य प्रणाली में ही अर्थ का सदुपयोग सुरक्षा, चरित्र, मूल्य सार्थक होना देखा गया है। मानवीयता अपने संक्रमित पद में है यही जागृति पद का साक्षी है, जागृति पद में ही मानवीयता पूर्ण आचरण प्रमाणित होता है। मानवीयता सहज परमता में ही प्रेमानुभूति पाया गया है। मानव संचेतना पूर्ण व्यवहाराभ्यास सहज परिपूर्णता में ही प्रेमानुभूति है। प्रेमानुभूति सहित सम्पूर्ण कार्य व्यवहार में सत्य सहज संप्रेषणा मानव परम्परा में प्रमाणित होता है। प्रेमानुभूति व्यवहारिक एवं सामाजिक, व्यवस्थात्मक, प्रामाणिक, अक्षुण्ण वैभव है। प्रेमानुभूति योग्य क्षमता-सम्पन्न होने के लिए शुचिता एवं गुणात्मक परिवर्तन में अनुशीलन अनिवार्य साधना है। सम्यकता की ओर गतिशीलता अर्थात् गुणात्मक परिवर्तन हेतु आचरण, व्यवहार एवं उत्पादन, उपकार, उपयोग, सदुपयोग, प्रयोजनशीलता उसकी निरंतरता ही उत्सव है। शारीरिक स्वस्थता एवं शिष्टता का योगफल ही शुचिता है। प्रमाण परम्परा में अनुगमन ही अनुशीलन है। प्रमाणत्रय पूर्वक जीवन तृप्ति है। प्रमाण ही परम्परा है।
मानव के चारों आयामों की पूर्ण जागृति ही प्रेमानुभूति योग्य क्षमता का सर्वसुलभ होना है। यही ऐतिहासिक उपलब्धि मानव में प्रतीक्षित है। यही मानव सहज इतिहास और गति है। ऐसी क्षमता से सम्पन्न व्यक्तियों के निर्माण योग्य कार्यक्रम ही अभ्युदय है। वह धार्मिक, आर्थिक एवं राजनैतिक कार्यक्रम ही है। ऐसे अविभाज्य कार्यक्रम में निपुणता, कुशलता, पाण्डित्य सहित मानव जीवन दर्शन सहज शिक्षा जो सहअस्तित्व विधि से प्रमाणित होता है यही पाण्डित्य है। इसका लोकव्यापीकरण होना ही मानवता सहज प्रमाण है। यही अभ्युदय है। अभ्युदय सहज प्रमाण ही प्रेमानुभूति है। यह सर्व मंगल कार्यक्रम है।
प्रेमानुभूति योग्य जन मानस का निर्माण करने के लिए मानवीय शिक्षा-संरकार की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। शिक्षा ही जीवन विश्लेषण पूर्वक, यथार्थताओं वास्तविकताओं पर आधारित जीवन के कार्यक्रम को स्पष्ट करती है। यही प्रत्येक मानव में पाई जाने वाली कामना एवं उसकी आवश्यकता है। यही शिक्षा का दायित्व है। शिक्षा ही जीवन में गुणात्मक परिवर्तन का स्रोत है चरितार्थ होने का आधार है। अंततोगत्वा यही अनुभव के लिए प्रेरणा है। वरिष्ठ अनुभूति प्रेमानुभूति ही है। यही पूर्णतया सामाजिक एवं व्यवहारिक है।