जागृति पूर्णता से सम्पन्न जीवन की आकाँक्षा मानव में प्रसिद्ध है अथवा प्रसिद्ध होने योग्य है। उसके योग्य वातावरण निर्माण करना ही सामाजिक कार्यक्रम है। यही सर्वमंगल कार्यक्रम है। यही समाधान, विश्राम एवं स्वर्ग है। सम्पूर्ण प्रकार के संयम, प्रमाण और प्रमाणिकता का संप्रषेण और अभिव्यक्ति है। यही अखंडता सार्वभौमता, अक्षुण्णता सहज स्रोत और गति है यही जागृति परम्परा है। प्रेमानुभूति की चरितार्थता है। मानवीय शिक्षा-संस्कार, समझदारी, सार्वभौम व्यवस्था, अखण्ड समाज, संस्कृति-सभ्यता, विधि, मूल्यांकन, निरीक्षण, परीक्षण, संप्रेषणा, प्रकाशन, संगीत, स्वर, लय, श्रुति, उत्सव, मानव संबंध और नैसर्गिक सम्बंधों में जीने की कला, स्थिति, गति समुच्चय प्रेमानुभूति सहज है। समझदारी सहित जागृत मानव सहज किया गया प्रत्येक क्रिया-प्रक्रिया एवं कार्यक्रम के फलन में मानव लक्ष्य, जीवन लक्ष्य सार्थक होता है।
प्रेमानुभूति लोकव्यापीकरण होने के अर्थ में सम्पूर्ण कार्यक्रम सम्पन्न होना ही मानव कुल में उसकी जागृति सहज चरितार्थता है। जागृत मानव कुल में चरितार्थता, सफलता एवं उज्जवलता सहज समाधान, समृद्धि अभयता एवं सहअस्तित्व ही है। सदुपयोग सुरक्षा के अर्थ में सुविधाओं की तारतम्यता उसकी व्यवहारिकता सार्थकता को प्रमाणित कर देता है। स्थापित मूल्य सहित सम्पूर्ण मूल्यों का मूल्यांकन योग्य कार्यक्रम मानवीयता सहज विधि से चरितार्थ होता है सार्थक होता है। यही जागृति का प्रमाण है। ऐसी जागृत परम्परा को स्थापित, प्रस्थापित, गतित, सार्थक करना ही सम्पूर्ण शिक्षा- शिक्षण, राष्ट्र, राज्य, समाज, समाज सेवी, धर्म, कर्म, प्रायश्चित उद्धारकारी, प्रौद्योगिकी और व्यापार संस्थाओं तथा व्यक्तियों का सहज कर्तव्य है। ऐसे कर्तव्य को पहचानने के लिए ऐसी सभी संस्थाओं और सभी व्यक्तियों को जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन, मानवीयता पूर्ण आचरण सहज समझदारी में पारंगत होना अपरिहार्य स्थिति है। ऐसे सार्वभौम समझदारी को ‘हम’ पा चुके है। ‘हम’ का तात्पर्य हम जितने नर-नारी जीवन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण में पारंगत हो चुके है, से है। हमारी प्रतिज्ञा ही है कि समझदारी को लोकव्यापीकरण करना। यही प्रेममय अभिव्यक्ति का साक्षी भी है। अस्तु, मानव कुल प्रेम और अनन्यता सहज विधि से कार्य व्यवहार विन्यास सर्वमानव सुलभ हो, ऐसी कामना है। इसे सार्थक बनाने का कार्यक्रम है।
13. वात्सल्य 14. सहजता
वात्सल्य :- (1) अभ्युदय के अर्थ में पोषण, संरक्षण की निरंतरता।