सुलभ होना समीचीन है। इसकी आवश्यकता प्रत्येक जागृत मानव में होना स्पष्ट है। इसे हर मानव निरीक्षण परीक्षण पूर्वक सर्वेक्षण कर सकता है। यह सब अनुभव मूलक विधि से धृति पूर्वक ही चरितार्थ होना पाया जाता है।

संकल्प सहज रूप में संपूर्णता सार्थकता के अर्थ में सम्पूर्ण प्रवृत्तियों का समाधान सूत्रित नियंत्रित तथा स्वयं स्फूर्त विधि से व्यवहार प्रमाणों में प्रमाणित करना सहज सुलभ होता है। इसी विधि से सुख, समाधान, सौंदर्य की अविभाज्य अभिव्यक्ति, संप्रेषणा, प्रकाशन प्रत्येक मानव में सफल होना पाया जाता है।

॥ नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥

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