जिसके फलस्वरूप समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व फलित होता है। बौद्धिक समाधान, भौतिक समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व सहज अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था को जानना-मानना अस्तित्व सहज मानव परम्परा सूत्र है। प्राकृतिक, सामाजिक एवं बौद्धिक नियमों को जानना-मानना, अनुभव करना जागृति मानव मानस सूत्र है। मानव से देव मानव, देव मानव से दिव्य मानव जागृति पूर्ण होने के तथ्य को जानना- मानना, अनुभव करना मानव व्यवहार सूत्र है।

मात्रा का उपयोग, गुणों का सदुपयोग, स्वभाव धर्म के मूल्यांकन में जागृति सहज प्रयोजनों को जानना-मानना अनुभव करना मानव व्यवहार सूत्र है।

न्याय, धर्म, सत्यपूर्ण दृष्टि व विधियों को जानना-मानना, अनुभव करना और पहचानना निर्वाह करना मानव व्यवहार सूत्र है। व्यवहार, व्यवसाय, विचार व अनुभव में सामरस्यता सूत्र धीरता, वीरता, उदारता, दया, कृपा, करुणा पूर्ण व्यवहार, व्यवस्था को जानना-मानना, अनुभव करना मानव जागृति परम्परा सहज व्यवहार सूत्र है। मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि और आत्मा की सामरस्यता को जानना-मानना, अनुभव करना यह जीवन जागृति सूत्र है। आशा, विचार, इच्छा, संकल्प व अनुभव में सामरस्यता को जानना-मानना, अनुभव करना जागृति सूत्र है। सम्बंधों को पहचानना, मूल्यों का निर्वाह करना और मूल्यांकन करना जानना- मानना, अनुभव करना व्यवहार सहज सूत्र है। विज्ञान और विवेक में सामरस्यता सहज वांड्गमय को प्रस्तुत करना प्रमाणित रहने की विधियों को जानना-मानना और अनुभव करना जागृत परम्परा सूत्र है। प्रतिभा और व्यक्तित्व में सामरस्यता सूत्र को जानना-मानना, पहचानना और निर्वाह करना समझदारी सहज सूत्र का प्रमाण है। परिवार सहज आवश्यकता से अधिक उत्पादन सहित तन, मन, धन का सदुपयोग, सुरक्षात्मक तथ्यों को समाधान पूर्वक जानना-मानना, पहचानना,-निर्वाह करना यह एक समझदार सुखी परिवार सूत्र है। सम्बंधों को पहचानना, मूल्यों का निर्वाह करना, मूल्यांकन करना और परिवार सहज रूप में अपनाए गए उत्पादन कार्य में परस्पर पूरक होने के तथ्य को जानना-मानना, अनुभव करना और पहचानना, निर्वाह करना सुख सुन्दर समाधान पूर्ण परिवार व विश्व परिवार सूत्र है।

नित्य वर्तमान सहज अस्तित्व में सम्पूर्ण भावों को जानना-मानना, अनुभव करना जीवन जागृति सूत्र है। प्रत्येक “एक” में रूप, गुण, स्वभाव, धर्म की सामरस्यता को जानना- मानना सहअस्तित्व सहज जागृति सूत्र है। प्रबुद्धता, संप्रभुता और प्रभुसत्ता सहज कार्यकलापों के मूल में अस्तित्व दर्शन, जीवन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण सहज सत्य को जानना-मानना,

Page 202 of 205