अनुभव करना, पहचानना और निर्वाह करना ही समाधान मूलक व्यवस्था जीवन जागृति व अभ्युदय सूत्र है। न्याय मूलक व्यवहार आवर्तनशील उत्पादन कार्यक्रम सहज तथ्यों को जानना- मानना, अनुभव करना पहचानना और निर्वाह करना जागृति मानव परम्परा सूत्र है। मानवीय आचार संहिता रूपी संविधान सहज व्यवहारवादी अखंड समाज व्यवस्था रूपी तथ्य को जानना-मानना, अनुभव करना और पहचानना-निर्वाह करना अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था सूत्र है।

बौद्धिक समाधान, भौतिक समृद्धि, अभय (वर्तमान में विश्वास), सहअस्तित्व सर्वमानव सहज शुभाकाँक्षा है। इसे सफल सार्थक लोकव्यापीकरण सहज आशय से “मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान प्रबंध” मानव में, मानव से, मानव के लिए अर्पित है।

भूमि: स्वर्गताम् यातु, मनुष्यो यातु देवताम्।

धर्मो सफलताम् यातु, नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥

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