चुका है। ऐसी नित्य सहज पूर्ण और व्यापक ऊर्जा में विभक्त रूप में संपृक्त अनंत प्रकृति परमाणु अंशों से चलकर महत् पिण्ड धरती, अनेक धरती ऊर्जा सम्पन्न रहती है। उन-उन की क्रियाशीलता निरंतर वर्तमान में प्रमाणित है ही। इसी के साथ-साथ सम्पूर्ण प्रकृति सत्ता में संतुलित - नियंत्रित रहती है यह भी स्पष्टतया दिखाई पड़ता है। अस्तित्व में परमाणु अंशों के नियंत्रित रहने का साक्ष्य, परमाणु के रूप में गठित रहने के रूप में है। परमाणु संतुलित रहने का साक्ष्य, उसके निश्चित आचरण और अणु रचना के रूप में द्रष्टव्य है। अणुयें संतुलित रहने का साक्ष्य, भौतिक रचनाओं के रूप में द्रष्टव्य है। भौतिक रचनाएँ संतुलित रहने का साक्ष्य रासायनिक क्रियाकलापों और रचनाओं के रूप में द्रष्टव्य हैं। रासायनिक द्रव्यों के संतुलन का साक्ष्य जीवन जागृति तथा वंश परंपराओं में व्यक्त और साक्षित होने योग्य शरीर रचनाओं में स्पष्ट है। जीवन का संतुलन वंशानुषंगीय और जागृति विधि में प्रवर्तित और प्रमाणित होने के रूप में द्रष्टव्य है। इसी क्रम में मानव का संतुलन अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था सहज समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व पूर्ण पद्धति, नीति और प्रणालियों के रूप में समीचीन है। इसे अध्ययनगम्य, व्यवहारगम्य कराने के क्रम में ही इस मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान का प्रणयन और प्रकाशन है।
क्रिया का सम्पूर्ण स्वरूप विभक्त प्रकृति के कार्यकलापों के रूप में देखा जाता है। निर्णयों का स्वरूप प्रत्येक एक में प्रमाणित होने वाले नियंत्रण, संतुलन, पूरकता, विकास परमाणु में; रचनाओं में उदात्तीकरण और रचना अर्थात् रासायनिक रचना; विकास और संक्रमण; संक्रमण और जीवनी क्रम; जीवनी क्रम, जीवन जागृति क्रम, जागृति और जीने का कार्यक्रम; जीने का कार्यक्रम और व्यवस्था; व्यवस्था और समाज; व्यवस्था और जागृति; जागृति और संचेतना (जानना, मानना, पहचानना और निर्वाह करने का क्रियाकलाप) सहित समाधान, समृद्धि, अभय एवं सहअस्तित्व को प्रमाणित करने की शिक्षा परम्परा हो। इसके लिए आवश्यकीय सभी यंत्रों सहित प्रयोग परम्परा को पहचानने-निर्वाह करने के रूप में प्रमाणित करना है। इस प्रकार विज्ञान पद्धति, प्रयोजनों की पुष्टि है।
विवेक का तात्पर्य जीवन का अमरत्व, शरीर का नश्वरत्व, व्यवहार सहज नियमों का अध्ययन और व्यवहार में प्रमाणित करने का सहज क्रियाकलाप है। जीवन का अमरत्व से- तात्पर्य परमाणु की गठनपूर्णता से है। गठनपूर्णता के अनंतर संक्रमण सहज चैतन्य पद प्राप्त परमाणु जीवन के नाम से ख्यात (प्रसिद्ध) हैं। ऐसे जीवन के अमरत्व ज्ञान (नित्य साक्षात्कार) जीवन विद्या से