मानव में स्थित जीवन की पुष्टि होती है। फलतः जीवन के प्रति जीवन का विश्वास, जीवन कार्यों के प्रति जीवन का ही विश्वास, जीवन प्रयोजन के प्रति जीवन का विश्वास पाया जाता है। जीवन सहज रूप में पाँच अक्षय बल, पाँच अक्षय शक्तियों का अंतर्सम्बन्ध और जीवन कार्य प्रयोजन के संबंध में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है।

जीवन में परावर्तन, प्रत्यावर्तन क्रिया संपादित होती है। इसे प्रकारान्तर से प्रत्येक व्यक्ति में निरीक्षण परीक्षण पूर्वक अध्ययन किया जा सकता है। स्व निरीक्षण विधि प्रत्यावर्तन को और पर निरीक्षण विधि परावर्तन को प्रमाणित करती है।

चयन क्रिया अर्थात् ग्रहण करने का क्रियाकलाप परावर्तन विधि से और आस्वादन क्रिया प्रत्यावर्तन विधि से स्वयं में संपन्न होती है। विश्लेषण क्रिया परावर्तन विधि से और तुलन क्रिया (प्रिय, हित, लाभ, न्याय, धर्म, सत्य दृष्टि) प्रत्यावर्तन विधि से संपन्न होती है। चित्रण क्रिया परावर्तन विधि से इच्छा पटल में चित्रित हो पाती है। परावर्तन में रचनाओं, क्रियाओं के रूप में प्रमाणित हो पाता है और चिन्तन क्रिया साक्षात्कार विधि से सार्थक होती है। साक्षात्कार की सम्पूर्ण वस्तु जीवन मूल्य, मानव मूल्य, स्थापित मूल्य, शिष्ट मूल्य और वस्तु मूल्य के रूप में द्रष्टव्य है। मूल्यों का संतुलन तुलन होकर तृप्ति विधि में संलग्न रहता है। इस प्रकार साक्षात्कार की तृप्ति का स्रोत मूल्य हैं और उसकी (मूल्यों की) निरंतरता का भावी होना पाया जाता है।

जीवन में संपन्न होने वाली अवधारणा बोध बुद्धि सहज प्रत्यावर्तन क्रिया है। सभी अवधारणाएँ, अध्ययन और अनुसंधान विधि से स्थापित हो पाती हैं। अनुभव मूलक विधि अनुभवगामी पद्धत्ति से बोध होना पाया जाता है। अनुभव सत्य बोध कराने में प्रमाणित होता है और संकल्प पूर्णता के अर्थ में, कल्पनाओं को गति देने से है। कल्पनाएँ आशा, विचार, इच्छा के संयुक्त रूप में प्रवाहित रहती हैं। जीवन शक्ति अक्षय होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति में कल्पनाशीलता का अक्षय होना पाया जाता है क्योंकि कल्पना जीवन शक्तियों का ही प्रवाह है। कल्पनाएँ सत्य संकल्प के अनुरूप परावर्तित होकर मानव परम्परा में अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था के रूप में सार्थकता को प्रमाणित करती है।

प्रमाणिकता, परावर्तन के रूप में स्वतंत्रता को व्यवहार में प्रमाणित करती है। इसी क्रम में स्वयं व्यवस्था और समग्र व्यवस्था में भागीदारी स्वयं स्फूर्त विधि से सम्पन्न होती है। अस्तित्व दर्शन, जीवन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण सहज प्रमाणों को सम्पूर्ण आयाम, कोण, दिशा, परिप्रेक्ष्यों में प्रमाणित करना सहज होता है। यही जागृति पूर्णता का परावर्तन है। इसके प्रत्यावर्तन में जागृति

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