और सहअस्तित्व ही है। जीवन सहज अभीष्ट सुख, शांति, संतोष और आनंद ही है। इन दोनों ध्रुवों के प्रमाणीकरण प्रणाली के रूप में ही मानव परम्परा में सार्वभौम व्यवस्था स्वानुशासन स्पष्ट हो जाता है।

व्यवस्था को जानने-मानने के फलस्वरूप उसमें निष्ठा पहचानने व निर्वाह करने के रूप में प्रमाणित होती है। व्यापार संबंधों में व्यवस्था नहीं होती क्योंकि व्यापार लाभोन्मादी प्रवर्तन है। इसके परिणाम स्वरूप अव्यवस्था भावी है और उसकी पीड़ा का होना पाया जाता है। अव्यवस्था मानव को वरेण्य नहीं है। लाभोन्माद स्व-सम्मोहन नामक आवेश है जिसका निराकरण आवश्यकता से अधिक उत्पादन करने में प्रमाणित है। यह तभी सहज होता है जब मानव मानवीयता को अपने स्व त्व के रूप में पहचान पाता है। यह जागृति क्रम में होने वाला सहज पद है। व्यक्ति किसी धरती पर सफल हुए होंगे इस धरती पर परम्परा के रूप में सार्वभौम व्यवस्था को अभी भी पहचाना नहीं गया है। अभी भी जीवन सहज रूप में मित्रता और निष्ठा का बोध होता है। ऐसा होते हुए भी व्यवहार, विचार, व्यवस्था के रूप में पहचानना, उसे सर्व-सुलभ कराना मानव की प्रतीक्षा में है। मित्र संबंधों में विश्वास और उसके निर्वाह में निष्ठा, जीवन जागृति और उसकी स्वीकृति की अभिव्यक्ति है। अस्तित्व में मानव कुल संस्कारानुषंगी विधि से ही एक अखंड स्थिति है। इसे सार्थक बनाने, होने, करने में और उसकी परम्परा रूप में, जागृति का धारक-वाहक बनना मानव के लिए एक आवश्यकता एवं अनिवार्यता बन चुकी है। इसकी नित्य संभावना समीचीन है। इस प्रकार मित्रता व निष्ठा की महिमा, संभावना और प्रयोजन, सामरस्यता व समाधान के अर्थ में प्रत्येक मानव को इंगित है।

9. पुत्र-पुत्री 10. अनुराग

पुत्र-पुत्री :- (1) शरीर रचना की कारकता सहज स्वीकृति और जीवन जागृति में पूरकता बराबर पिता। (2) पोषण सुरक्षा की स्वीकृति। (3) संतानों में आवश्यकीय आजीविका का स्रोत अथवा आधार रूप में स्वयं को स्वीकारना। (4) शिक्षा- संस्कार प्रदान करने में सक्षम, योग्य, स्वीकारना (मानना)। (5) सम्पूर्ण ज्ञान प्रावधानित करने के लिए स्वयं में स्वीकारना (मानना) हर जागृत अभिभावक इन पाँच विधियों में, से, के लिए स्वीकारते है तभी पुत्र पुत्री का संबंध जागृत परम्परा पीढ़ी दर पीढ़ी के रूप में स्वीकार होता है। यह माता पिता का अधिकार स्वीकृति अथवा मान्यता का स्वरूप है। इनमें से स्वयं की जागृति के अनुरूप निर्वाह करता हुआ देखने को मिलता है।

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