17. हित 18. स्वास्थ्य
हित :- शरीर सीमानुवर्तीय उपयोगिता।
स्वास्थ्य :- (1) मन एवं प्रवृत्तियों के अनुसार कर्मेन्द्रिय एवं ज्ञानेन्द्रियों का कार्य करने योग्य स्थिति में होना। (2) स्पंदन-स्फुरण योग्य स्थिति में कर्मेन्द्रिय एवं ज्ञानेन्द्रियों का होना।
शरीर सीमानुवर्तीय उपयोगिताएं शरीर पोषण-संरक्षण के रूप में प्रमाणित होना पाया जाता है अथवा सार्थक होना पाया जाता है। प्रत्येक मानव जीवन और शरीर के संयुक्त रूप में है, यह स्पष्ट हो चुका है। शरीर स्वस्थता के प्रति जागृति (अथवा मन सहित जीवन अपनी मौलिकताओं को संप्रेषित होने) और अस्तित्व में, से, के लिए प्रेरणा पाने प्रमाणित करने में सामरस्यता बनाए रखने में शरीर एक माध्यम है। शरीर अपने सहज रूप में प्राणकोषाओं की रचना है। शरीर रचना गर्भाशय में संपन्न होता है, यही वंश और वंशानुषंगीयता का प्रमाण हैं। जीवन चैतन्य पद का वैभव हैं। सहअस्तित्व वर्तमान हैं। सूत्र के आधार पर जीवन और शरीर का योग-संयोग नियति सहज विधि से वर्तमान सहज हुआ है। इसी क्रम में परस्पर पूरक होना विकास सहज है।
प्राण कोशाओं से कर्मेन्द्रियों, ज्ञानेन्द्रियों समेत रचना सम्पन्न होने के उपरान्त जीवन्तता की आवश्यकता शेष रहती है। दूसरी ओर जीवन, चैतन्य पद में होते हुए भी उसको जागृति की आवश्यकता रहती है। जागृति और जागृति पूर्ण परम्परा का सहज क्रम में मानव परम्परा ही सर्वोपरी व उपयुक्त है। मानव शरीर, रचना क्रम के आधार पर ही जीवन मनाकार को साकार करता है और मनः स्वस्थता को परम्परा में प्रमाणित करने का कार्य संपादित करता है। यह अवसर प्रत्येक मानव के लिए समीचीन है। मनाकार को साकार करने के क्रम में सामान्य आकाँक्षा तथा महत्वाकाँक्षा सम्बन्धी वस्तुओं को उत्पादित करना मानव सहज है। जिसका उपयोग, सदुपयोग व प्रयोजन क्रम से शरीर पोषण, परिवार संरक्षण और समाज गति के रूप में साक्षित होता है। मनः स्वस्थता अथवा जीवन का प्रमाण प्रामाणिकता और सर्वतोमुखी समाधान, समाज न्याय और उत्पादन में नियमों को प्रमाणित करना ही साक्ष्य है। प्रत्येक मानव का यही अभीष्ट है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि शरीर स्वस्थता का दृष्टा जीवन है। जीवन स्वस्थ न रहने की स्थिति में शरीर स्वस्थता का सार्वभौम मापदण्ड मिलना ही संभव नही है। इसीलिए यह तथ्य समझ में आता है कि जीवन स्वस्थ रहने की स्थिति में शरीर को स्वस्थ रखकर मानवीयता पूर्ण विधि से व्यवहार में प्रमाणित करना-कराना सहज है।