उपरोक्त वर्णित चित्रण से मानवीयता पूर्ण पद्धति से भाई व मित्र संबंध सफल और अमानवीयता पूर्वक असफल होना स्पष्ट है। मानवीयता के प्रकाशन में सभी संबंध सहज रूप में दिखाई देते हैं। उसके निर्वाह करने का मार्ग प्रशस्त होता है।

31. बहन 32. उन्नति

संबंध = पूर्णता के अर्थ में अनुबन्ध।

पूर्णता = आचरण, व्यवहार, व्यवस्था में भागीदारी में नियम, नियंत्रण, संतुलन, न्यायपूर्वक समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व का प्रमाण व परस्परता में मूल्यांकन उभय तृप्ति सहज सुलभ होना ही मानव सहज सभी सम्बंधों में आवश्यकता है।

अनुबंध = सार्थकता का अनुभव मूलक बोध संपन्न संकल्प सहज निष्ठा।

निष्ठा = अनुबंध संकल्प की निरंतरता।

अनुभव = अनुक्रम अर्थात् नियतिक्रम में प्रमाणित होना।

प्रमाण = जागृति पूर्वक आचरण ही प्रमाण है। संबंधों में न्याय प्रमाण है।

उन्नति :- 1. समृद्धि प्रधान समाधान सहज अपेक्षा, प्रक्रिया एवं प्रमाण। 2. जागृति और उसकी निरंतरता की ओर गति।

बहन :- एकोदरीय (एक पेट से पैदा होने वाली) अथवा एकोदरवत् बहनें होती हैं। यह संबंध निरंतर विकास के लिए प्रेरक है। मानव के संबंध में उन्नति शब्द का तात्पर्य जागृति और उसकी निरंतरता से है। यही परस्परता में, से, के लिए प्रेरक होना पाया जाता है। प्रत्येक बहिन को भाइयों से सभी ओर श्रेष्ठता की अपेक्षा बनी रहती है। मानव सहज रूप में बल, बुद्धि, रूप, पद, धन सम्पदा के रूप में विदित है। इनमें श्रेष्ठता की कामना सभी संबंधों की परस्परता में प्रत्याशा के रूप में देखी जाती है। साथ ही सच्चरित्रता व्यवहार में सामाजिक, सच्चरित्र मानवीयता पूर्ण आचरण, व्यवसाय में स्वावलम्बी अथवा समृद्धि की अपेक्षा हर भाई-बहिन के संबंध में सहज रूप में देखने को मिलती है। इस प्रकार यह संबंध परस्पर विकास व उन्नति का प्रेरक और सहायक होना सहज है।

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