व्यापार गद्दियों में आसीन होकर संसार को दिशा देने गये। ऐसे दिशा निर्देशन विचार कार्यों के मूल में आदर्शवाद यथा अध्यात्म, अधिदैवी व अधिभौतिक विचार व प्रयास रहते आया। परिणाम में रहस्य ही हाथ लगा। दूसरा भौतिकवाद विज्ञान के नाम से वंशानुषंगीय सापेक्ष व मात्रा विज्ञान अपने ही शोध के क्रम में अस्थिरता अनिश्चयता के दलदल में फंस गये। जहाँ तक सार्थक तकनीकी जितने भी हाथ लगी है अधिकांश अक्रमिक घटनाओं के रूप में घटित हुए। शिक्षा प्रयोग विधि से लोक व्यापीकरण संपन्न हुआ है।

आदर्शवादी मानसिकता

भौतिकवादी मानसिकता

(1) चेतना से वस्तु पैदा होती है। सर्वशक्ति मान ब्रह्म, देवता, ईश्वर से सब कुछ संचालित होता है। सर्वशक्ति से भयभीत होकर ही ग्रह गोल अपना-अपना काम करते हैं।

(1) वस्तु से चेतना पैदा होती है। प्रकृति सब कुछ है। सब कुछ अस्थिर एवं अव्यवस्था की ओर है।

(2) अहिंसा का पक्षधर।

(2) पैसा व पद से प्रबंधन होता है।

(3) सहिष्णु।

(3) धरती व इसके वातावरण के साथ अधिकतम अपराध, पर्यावरण के साथ अपराध करना।

(4) धरती के साथ नहीं के बराबर व जंगलों का आंशिक शोषण।

(5) आस्था के लिए पीढ़ी से पीढ़ी पर बल।

आदर्शवाद से उत्पन्न विसंगतियाँ

(भौतिकवाद) तकनीकी कर्माभ्यास से स्वीकृत उपलब्धियाँ

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