निर्वाह रूपी व्यवहार करना सुलभ होता है। प्रत्येक संबंध निश्चित ध्रुव है। जैसे माता-पिता, पुत्र-पुत्री, स्वामी-सेवक, गुरू-शिष्य, भाई-बहिन, मित्र, पति-पत्नी। सम्पूर्ण संबंध नियति सहज रूप में वर्तमान रहते हैं। इनके प्रति जागृत होना एक अनिवार्य स्थिति है। जागृत और जागृतिपूर्ण कार्य व्यवहार, विन्यास होना सहज है।
मानव परम्परा सहज रूप में बहु आयामी पहचान प्रवृत्ति वर्तमान है। अस्तित्व ही सहअस्तित्व होने के फलस्वरूप पदार्थावस्था ने परिणामानुषंगीय विधि से विविध तत्वों के रूप में संतुलन को व्यक्त किया है। प्राणावस्था ने बीजानुषंगीय विधि से विविध वनस्पतियों के रूप में संतुलन को व्यक्त किया है। जीवावस्था में वंशानुषंगीय विधि से अनेक प्रकार की जीव परम्परा ने संतुलन को व्यक्त किया है। मानव के लिए संस्कारानुषंगीय विधि से समाधान, समृद्धि, अभय और सहअस्तित्व को प्रमाणित करना सार्थकता है। इसे स्वराज्य व स्वतंत्रता पूर्वक मानवीय संस्कृति (सम्बंधों की पहचान, स्थापित शिष्ट मूल्य का निर्वाह), मानवीय सभ्यता (मानव मूल्य व जीवन मूल्यों का वर्तमान में प्रमाणीकरण), विधि (मानवीयता पूर्ण आचारण संहिता) की रक्षा, व्यवसाय आवश्यकता से अधिक उत्पादन सहित (स्वयं व्यवस्था होने में विश्वास और परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था जो - (1) शिक्षा-संस्कार (2) न्याय-सुरक्षा (3) उत्पादन कार्य (4) विनियम कोष (5) स्वास्थ्य-संयम व्यवस्था में भागीदारी को प्रमाणित करना मानव परम्परा की सार्थकता है। मानव, परम्परा के रूप में अखंड है। मानवीयता पूर्ण संस्कार परम्परा में मानवीय शिक्षा संस्कार सार्वभौम है। मानव, परम्परा में स्वराज्य, स्वतंत्रता सार्वभौम है। मानव परम्परा में न्याय-सुरक्षा, श्रम नियोजन व श्रम विनियम रूपी विनियम कार्य, सार्वभौम प्रमाणित होता है। साथ ही मानव जाति में अखंडता मानव धर्म, इसके अनुसंधान का उद्देश्य प्रामाणिकता और सर्वतोमुखी समाधान सार्वभौम है। इसलिए मानव अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था के रूप में सहज है।
परिवार ही व्यवस्था के रूप अखंड है। परिवार में समाधान, समृद्धि, अभय और सहअस्तित्व प्रमाणित होता है। इसलिए सम्पूर्ण मानव परिवार ही समाज का स्वरूप है।
प्रत्येक संबंध का ध्रुव परिवार रचना का आधार है। परिवार रचना संबंधों को पहचानना, मूल्यों का निर्वाह करने के रूप में है। संबंध मानव तथा नैसर्गिक भेद से पाया जाता है। एक से अधिक मानवों का होना ही संबंधों का होना है जो वर्तमान ही होता है। इस प्रकार वर्तमान में जो कुछ