3.2.2 व्यवहार मूल्य
व्यवहार सहज 18 मूल्य
सम्बन्धों के साथ ही शिष्टता विधि स्वाभाविक है। सम्बन्धों का सम्बोधन मानव संबंधों के आधार पर ही निश्चित मूल्य और शिष्टता का द्योतक होता है। यह परिवार (अखण्ड समाज) क्रम में और सभा-विधि में जैसे परिवार सभा और विश्व परिवार सभा में भी परस्पर सम्बोधन मानव संबंधों का सम्बोधन विधि से ही शिष्टता का निश्चयन है। परिवार विधि में हर सम्बोधन प्रयोजन से लक्षित होना पाया जाता है। और हर प्रयोजन हर व्यक्ति के अपेक्षा सहित सम्बोधन का वस्तु है।
परिवार क्रम में
सम्बोधन प्रयोजन
- पिता - संरक्षण
- माता - पोषण
- पति-पत्नी - यतित्व-सतीत्व
- पुत्र-पुत्री - अनुराग
- स्वामी (साथी) - दायित्व
- सेवक (सहयोगी) - कर्तव्य
- गुरू - प्रामाणिकता
- शिष्य - जिज्ञासु
- भाई-बहन-मित्र - जागृति (समाधान-समृद्धि)
परिवार विधि विहित सम्बोधन, परिवार विधि का तात्पर्य परिवार सम्बन्ध से है। जैसे एक ही व्यक्ति किसी का माता, किसी का पुत्री, किसी का बहिन, किसी का पत्नी, किसी का गुरू, किसी का शिष्य, किसी का मित्र, किसी का बंधु सम्बन्धों में पाया जाता है। संबंध की परिभाषा ही पूर्णता के अर्थ में अनुबंध है। अनुबंध का तात्पर्य बोध सहित निष्ठा सहज किसी के प्रति प्रयोजन कार्य और निष्ठा सहित स्वीकृति का सत्यापन ही प्रतिज्ञा होता है। स.श. (181-183)
संबंध पहचनाने से मूल्य अपने आप बहते है। स्थापित मूल्य 9 और शिष्ट मूल्य 9 हैं। शिष्ट मूल्य परस्परता में व्यक्त होते है। स्थापित मूल्य स्वयं में अनुभव होते हैं ।
मानवीय चेतना संपन्न मानव संबंध में स्थापित व शिष्ट मूल्य निम्न है :-