(शिष्ट मूल्य)
नाम कार्य
(1) सौम्यता स्वेच्छा से, स्वयं स्फूर्त विधि से, स्वयं की नियंत्रण क्रिया।
(2) सरलता ग्रंथि व तनाव रहित अंगहार, क्रियाकलाप।
(3) पूज्यता गुणात्मक विकास, जागृति सहज स्वीकृति सहित किए गए क्रियाकलाप।
(4) अनन्यता मानव की परस्परता में, पूरक क्रियाकलाप। (एकात्मता) प्रामाणिकता व समाधान में निरंतरता। अविकसित के विकास में सहायक क्रिया।
(5) सौजन्यता सहकारिता, सहयोगिता, सहभागिता सहज क्रियाकलाप।
(6) सहजता आंडबर तथा रहस्यता से मुक्त व्यवहार, रीति, विचार एवं अनुभव की एक सूत्रता क्रिया।
(7) उदारता दूसरों के उत्थान के लिए आवश्यकतानुसार तन, मन, धन रूपी अर्थ का अर्पण, समर्पण क्रिया।
(8) अरहस्यता (सौहाद्रता) जिस प्रकार से स्वीकृत है, उस अवधारणा, स्मृति अथवा श्रुति को यथावत प्रस्तुत करने का क्रियाकलाप।
(9) निष्ठा लक्ष्य को स्मरण पूर्वक प्राप्त करने का निरंतर प्रयास।
म.वि. (180)
किसी भी संबध को, चाहे माता-पिता, पुत्र-पुत्री, गुरू-शिष्य, पति-पत्नी, स्वामी-सेवक, मित्र-मित्र सम्बन्ध सभी हो अथवा एक से अधिक हो उनमें विश्वास साम्य मूल्य है। इसका निर्वाह होना ही विश्वास की गवाही है। विश्वास ही आधार मूल्य है। प्रेम पूर्ण मूल्य है। म.वि. (72-73)
3.2.3 परिवार व्यवस्था में जीना, समृद्धि
निश्चित संख्या में जागृत (नर-नारी) मानव जो परस्पर सम्बन्धों को पहचानते व मूल्यों का निर्वाह करते हैं और परिवार गत उत्पादन कार्य में परस्पर पूरक होते हैं। ऐसे कम से कम 10 व्यक्तियों का समूह परिवार की संज्ञा है। म.वि. (179)