स्थापित मूल्य |
(1) कृत्तज्ञता - प्राप्त सहायता उपकार के प्रति स्वीकृति प्रसन्नता व निरंतरता की स्वीकृति |
(2) गौरव - विकसित (जागृत) को पहचान एवं उनके अनुरूप होने में उत्साह और निरंतरता |
(3) श्रद्धा - प्रामाणिकता, श्रेष्ठता की ओर प्रवृत्ति एवं संकल्प सहित गति |
(4) प्रेम - पूर्णता सहज प्रमाण; दया कृपा करूणा की संयुक्त अभिव्यक्ति।पूर्णता में नित्य रति, पूर्णता की सहज निरंतरता |
(5) विश्वास - संबंध निर्वाह निरंतरता सहित मूल्यों के निर्वाह |
(6) वात्सल्य - अभ्युदय सर्वतोमुखी समाधान के अर्थ में पोषण संरक्षण व्यक्तित्व में संतुलन, व्यवहार में निरंतरता |
(7) ममता - स्वयं में, से, के लिए प्रतिरूपता सहज स्वीकृति, उत्सव निरंतरता |
Table of contents
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-1
टिपण्णी
1
खण्ड -१: पृष्ठभूमि
2
अध्याय १ – अनुसन्धान
Subsection
5
अध्याय २ - समाधान की आवश्यकता
Subsection
12
अध्याय ३ - प्रस्तावना
Subsection
23
खण्ड 2: अस्तित्व सहअस्तित्व है
24
अध्याय 1 - अस्तित्व में व्यवस्था (सहअस्तित्व)
Subsection
46
अध्याय 2 - मानव स्वयं में व्यवस्था
Subsection
71
अध्याय 3 : मानव-मानव संबंध में व्यवस्था
Subsection
115
खण्ड 3: सारांश
116
अध्याय 1 - सारांश
Subsection
127
अध्याय 2 - आगे अध्ययन हेतु संकेत
Subsection