(i) चरित्र
मानवीयतापूर्ण आचरण, कार्य रूप में स्वधन, स्वनारी/ स्वपुरूष, दया पूर्ण कार्य व्यवहार के रूप में देखा जाता है। यह मानवीयता पूर्ण चरित्र के रूप में प्रमाणित होता है। - म.वि. 28-29
(ii) सम्बन्ध एवं मूल्य
मूल्यों का प्रमाण संबंधों को पहचानने के उपरान्त ही होता है। यह सर्वमानव विदित है अथवा सर्वमानव इसे परीक्षण कर सकता है। अस्तित्व सहज सह-अस्तित्व विधि से सम्बन्ध नित्य वर्तमान है। संबंध का तात्पर्य पूर्णता के अर्थ में अनुबंधित होने से है। अनुबंध का तात्पर्य निष्ठा से है। वह भी स्वीकृतिपूर्वक स्वयं स्फूर्त निष्ठा से है। यह निष्ठा स्वायत्त मानव में ही प्रतिपादित और प्रमाणित होता है।
संबंधों के आधार पर जैसा मानव संबंधों को प्रयोजनों और व्यवस्था के सूत्रों के रूप में देखा गया है कि सम्मान संबंध जिसमें सम्मानित होने वाला और सम्मान करने वाले का परस्परता में होने वाले कार्यव्यवहार सम्मान संबंध का साक्ष्य है। सम्मान संबंध में स्पष्ट हो चुका है कि स्वयं से अधिक जागृत प्रमाणित व्यक्तियों के प्रति, स्वयं के प्रति विश्वास के आधार पर स्वयं स्फूर्त विधि से मुखरित और आचरित होने वाला क्रियाकलाप जिसका प्रयोजन सम्मानित होने वाले व्यक्ति में सम्मान किया या स्वीकृति होना आवश्यक है। सम्मान परस्परता में मूल्यांकन है। ऐसा सम्मान करने और सम्मानित होने का मूल्यांकन उभयतृप्ति का स्रोत होना पाया जाता है। सम्मान करने, सम्मान स्वीकृत करने का क्रियाकलाप ही जागृति सहज व्यवहार कहलाता है। संबंध स्वयं से, स्वयं के लिये, स्वयं में जाना, माना, पहचाना हुआ, निर्वाह करने के लिये आधार है। स्वयं में तृप्ति पाने का उद्देश्य अथवा तृप्त होने का उद्देश्य और तृप्त रहने का उद्देश्य बना ही रहता है। संबंधों को पहचानने के उपरान्त उसका प्रयोजन केवल भय मुक्ति ही है। – स.श. 81-85
मानव परंपरा में मूल्यांकित, प्रमाणित होने वाले सम्पूर्ण मूल्य पाँच वर्गों में और तीस संख्या में देखने को मिलता है। यथा-
- जीवन मूल्य चार हैं :-
- 1. सुख 2. शांति 3. संतोष 4. आनन्द।
- मानव मूल्य छः हैं :-
- 1. धीरता 2. वीरता 3. उदारता 4. दया 5. कृपा 6. करुणा ।
- स्थापित मूल्य नौ हैं :-
- 1. कृत्तज्ञता 2. गौरव 3. श्रद्घा 4. प्रेम 5. विश्वास 6. ममता 7. वात्सल्य 8. स्नेह 9. सम्मान।
- शिष्ट मूल्य नौ हैं :-
- 1. सौम्यता 2. सरलता 3. पूज्यता 4. अनन्यता 5. सौजन्यता 6. उदारता 7. सहजता 8. निष्ठा 9. अरहस्यता/स्पष्टता
- वस्तु मूल्य दो हैं :-
1. उपयोगिता मूल्य, 2. कला मूल्य। - स.श. 148-149