नहीं है। सकारात्मक विधि से अविभाज्यता का तात्पर्य प्रत्येक सीढ़ी दूसरे सीढ़ी के लिए अनुप्राणन सूत्र है। - स.श. 127, 128

समाज गति का तात्पर्य अखंड समाज के अर्थ में भागीदारी करना अर्थात् सार्वभौम व्यवस्था में भागीदारी करना। परिवार व्यवस्था से विश्व परिवार व्यवस्था तक समाज गति के अर्थ को ध्वनित करता है यह ध्वनि परिवार में न्यूनतम होकर विश्व परिवार में सर्वाधिक विशाल हो जाती है इस बीच क्रम विधि से परिवार व्यवस्था से, परिवार समूह व्यवस्था, परिवार समूह व्यवस्था से ग्राम मोहल्ला परिवार व्यवस्था ग्राम मोहल्ला परिवार व्यवस्था से ग्राम मोहल्ला परिवार सभा, ग्राम मोहल्ला समूह व्यवस्था से क्षेत्र परिवार व्यवस्था, क्षेत्र परिवार व्यवस्था से मंडल परिवार व्यवस्था, मंडल परिवार व्यवस्था से मंडल समूह परिवार व्यवस्था, मंडल समूह परिवार व्यवस्था से मुख्य राज्य परिवार व्यवस्था, मुख्य राज्य परिवार व्यवस्था से प्रधान राज्य परिवार व्यवस्था, प्रधान राज्य परिवार व्यवस्था से विश्व राज्य परिवार व्यवस्था तक बुलंद होती जाती है यह व्यवस्था में भागीदारी की बुलंदी है बुलंदी का मतलब मजबूती से है। इस प्रकार हर मानव अपनी पहचान को परिवारगत व्यवस्था से दस सोपानीय व्यवस्थाओं में पहचान बनाना सहज है। -ज.व. 93,94

प्रबुद्धता

= समझदारी + ईमानदारी।

= सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व दर्शन, जीवन क्रियाकलापों के रूप में जीवन ज्ञान, भौतिक रासायनिक क्रियाकलाप

संप्रभुता

= ईमानदारी + जिम्मेदारी।

= नित्य सर्वतोमुखी समाधान सम्पन्नता

प्रभुसत्ता

= जिम्मेदारी + भागीदारी

= व्यवहार कार्य के लिए सार्थक होने वाले नियम नियंत्रण, संतुलन, न्याय धर्म सहअस्तित्व रूपी परम सत्य का प्रमाण परम्परा।- डायरी २०१०

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