फलस्वरूप मानव के लिए ही, जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन, मानवीयता पूर्ण आचरण सहज रूप में समझ में आता है। अध्ययन विधि से अस्तित्व बोध के अनंतर ही मानव में अनुभव पूर्वक पूर्णता और उसकी निरंतरता की आवश्यकता और प्रयोजन-बोध होता है। इसी के फलस्वरूप ही मानवीयता पूर्ण आचरण, प्रमाणित होता है - जो स्वयं ही समाधान समृद्घि पूर्ण परिवार, समाधान समृद्घि अभय पूर्ण समाज तथा समाधान समृद्घि अभय, सह-अस्तित्व सहज व्यवस्था मानव परम्परा में, से, के लिए सुलभ होना समीचीन है। इसकी आवश्यकता प्रत्येक जागृत मनुष्य में होना स्पष्ट है। इसे हर मानव निरीक्षण परीक्षण पूर्वक सर्वेक्षण कर सकता है। - भ.व. 58
अस्तित्व में, से, के लिए ही सम्पूर्ण अध्ययन है क्योंकि अस्तित्व समग्र ही स्थिति में नित्य वर्तमान है। अस्तित्व न घटता है न बढ़ता है। इसीलिए अस्तित्व में, से, के लिए मानव अध्ययन करने के लिए बाध्य है। क्योंकि यह अध्ययन मानव को अपने जीवन जागृति का साक्ष्य प्रस्तुत करने के क्रम में अपरिहार्य है। फलत: प्रामाणिकता, प्रमाण और समाधान की स्थिति के लिए तत्पर होना पड़ा। इसी क्रम में निर्भ्रमता की अभिव्यक्ति है। इसकी संप्रेषणा भी होती है। यही मानव परम्परा की गरिमा और सामाजिक अखण्डता का सूत्र है। यही शिक्षा, व्यवस्था और चरित्र में सामरस्यता के स्वरूप को स्पष्ट करता है। यही अनुभवपूर्ण सह-अस्तित्व ही विचार शैली एवं जीने की कला के लिए आवश्यक है।
समझने की सम्पूर्ण वस्तुएँ हैं-
- स्थिति सत्य,
- वस्तु स्थिति सत्य,
- वस्तुगत सत्य।
स्थिति सत्य अपने आप में सत्ता में संपृक्त जड़-चैतन्य-प्रकृति के रूप में वर्तमान है। जिसकी समझदारी अर्थात् दर्शन मानव में, से, के लिए ही संभव व प्रमाणित होता है, जिसमें पदार्थावस्था, प्राणावस्था, जीवावस्था और ज्ञानावस्था, ये सभी अवस्थाएँ अविभाज्य रूप में सत्ता में संरक्षित व नियंत्रित रहना पाई जाती हैं।
वस्तु स्थिति सत्य ''दिशा, काल, देश” के रूप में स्पष्ट है। परस्परता में दिशा है। इकाई में अनंत कोण हैं। हर वस्तु देश के रूप में उसी के रचना के समान होता है। क्रिया की अवधि, काल के रूप में, अस्तित्व में ही मानवकृत गणना है।
वस्तुगत सत्य प्रत्येक एक में रूप, गुण, स्वभाव, धर्म सहित दृष्टव्य है। - भ.व. 136
- समझने की सम्पूर्ण वस्तु नियम, न्याय, धर्म सत्य ही है।
- चारों अवस्थाओं में रूप गुण स्वभाव धर्म को समझना, उनके अंतरसंबंधों को समझना
- यथार्थता वास्तविकता सत्यता को समझना