3.2 जीवन के 10 क्रियाएं - परिचय
इस चित्र में मानव में दस क्रियाएँ बताई गई हैं, जिनमें से पाँच क्रियाएँ बल के रूप में तथा पाँच क्रियाएँ शक्ति के रूप में कार्यरत रहती हैं। जागृत मानव में, से, के लिए बल और शक्ति ही, स्थिति और गति के रूप में प्रमाणित होते हैं। स्थिति और गति अविभाज्य है, इसको स्वयं में ऐसा अनुभव किया जा सकता है, निरीक्षण किया जा सकता है। मनोबल आस्वादन-चयन के रूप में, वृत्ति बल तुलन विश्लेषण के रूप में, चित्त बल चिन्तन-चित्रण के रूप में, बुद्घि बल बोध व संकल्प के रूप में, आत्मबल अनुभव प्रामाणिकता के रूप में पहचानने में आता है। शक्तियाँ क्रमश: मन शक्ति चयन के रूप में, वृत्ति शक्ति विश्लेषण के रूप में, चित्त शक्ति चित्रण के रूप में, बुद्घि शक्ति संकल्प के रूप में, आत्म शक्ति प्रामाणिकता के रूप में प्रमाणित हो पाता है। (स्थिति में प्रत्यावर्तन, गति में परावर्तन है) – भ.व. 139-143