चौथी कड़ी विनिमय कोष होगी इसका आदान-प्रदान विनिमय कार्य को मुख्य राज्य परिवार सभा सम्पन्न करेगी। इसमें सभी आदान-प्रदान व्यवस्था विनिमय प्रक्रिया में ही समाहित रहेगी। इसमें संतुष्टि बिन्दु यही है कि सर्वाधिक उत्पादन हो जो आवश्यकता से अधिक हो, आवश्यकता का आंकलन सभी सोपानीय व्यवस्था में संबंध अनुबंध से पहचानने की व्यवस्था रहेगी।
पांचवी कड़ी स्वास्थ्य-संयम रहेगी प्रधान रूप में प्रौद्योगिकी में कार्य करने वालों के लिए बना ही रहेगा। उनके साथ अन्य सभाओं के द्वारा आये हुए स्वास्थ्य संयम समस्या ग्रस्त व्यक्तियों को राहत प्रदान करेगी। स्वास्थ्य संयम कार्यक्रम का पूरे परिवार के सम्मिलित कार्यक्रम को साधनों की पूर्ति उत्पादन कार्यों से सम्पन्न होने की व्यवस्था रहेगी। इस क्रम में सम्पूर्ण व्यवस्था का वैभव मानव के लिए अतिप्रयोजनशील होना देखा गया है एवं समझ में आता है।
नवें सोपान में प्रधान राज्य सभा होगी यह दस निर्वाचित सदस्यों से गठित होगी। यह दस सदस्य दस मुख्य राज्य परिवार सभा में कार्यरत दस-दस सदस्यों में से एक-एक व्यक्ति निर्वाचित किये जाने की विधि से उपलब्ध रहेगी। इसमें ऐसे पारंगत विद्वान होने के आधार पर प्रधान राज्य सभा का गठन गरिमामय होना स्वाभाविक है। इस सभा गठन कार्य के लिए जितने भी साधनों की आवश्यकता रहती है दस मुख्य राज्य सभाओं के द्वारा संचालित उद्योगों के आधार पर प्रावधानित रहेगी। ये सभी प्रावधान अपने आप में लोकार्पण विधि से संपादित रहेगी। दूरसंचार व्यवस्था भी इन्हीं स्त्रोतों से समावेशित रहेगी। फलस्वरूप प्रधान राज्य सभा की गति सुस्पष्ट रहेगी अथवा आवश्यकता अनुसार रहेगी।
इस सभा की पहली कड़ी शिक्षा-संस्कार ही रहेगी। प्रधान राज्य परिवार सभा से संचालित शिक्षा समूचे दसों मुख्य राज्यों की संस्कृति, सभ्यता, विधि, व्यवस्था की सार्थकता और समग्र व्यवस्था की सार्थकता के आँकलन पर आधारित श्रेष्ठता और श्रेष्ठता के लिए अनुसंधान, शोध, शिक्षण, प्रशिक्षण कर्माभ्यासपूर्वक रहेगी। प्रौद्योगिकी विधा का कर्माभ्यास प्रधान रहेगा। व्यवहार अभ्यास प्रक्रिया में प्रमाणीकरण प्रधान रहेगा। इस प्रकार यह उन सभी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायी शिक्षा व्यवस्था रहेगी और लोकव्यापीकरण करने के नजरिये से चित्रित करने की प्रवृत्ति रहेगी। इसी मानवीय शिक्षा कार्यक्रम में साहित्य कला की श्रेष्ठता के संबंध में प्रयोजन के अर्थ में मूल्यांकन रहेगी। श्रेष्ठता प्रबंध, निबंध, कला, प्रदर्शन, साहित्य, मूर्ति कला, चित्रकलाओं के आधार पर मूल्यांकन और सम्मान करने की व्यवस्था रहेगी।