3. साधन : तन, मन व धन ही साधन है । सर्वमानव के लिए जागृति ही साध्य है ।

  • साधन की प्रयुक्ति कायिक, वाचिक, मानसिक, कृत, कारित एवं अनुमोदित भेद से कुल नौ प्रकार की होती है । इन समस्त साधनों को तीन क्षेत्रों में ही प्रयुक्त किया जा रहा है :-

(1) प्राकृतिक क्षेत्र (2) सांस्कृतिक क्षेत्र (3) बौद्धिक क्षेत्र ।

  • # सहअस्तित्व व सामाजिकता का अध्ययन व्यक्ति के जागृति एवं व्यवहार के संदर्भ में ही है ।
  • # मानव धर्मनीति का अध्ययन अपेक्षाकृत ढंग से ही संभव है वह है अतिमानवीयता की अपेक्षा में मानवीयता का अध्ययन तथा अतिमानवीयता एवं मानवीयता की अपेक्षा में अमानवीयता की समीक्षा । यह सहअस्तित्व, सामाजिकता, समृद्धि, समाधान, संतुलन, सच्चरित्रता एवं सुख, शांति, संतोष, आनन्द के उद्देश्य से किया जाता है और यही मानव की आद्यान्त आकांक्षा है ।
  • # अखंड समाज समझदारी सहित समझदार व्यक्तियों के उद्देश्यपूर्ण आचरण संहिता समेत व्यवस्था प्रणाली ही है । अखंड समाज में व्यक्ति संपर्क एवं संबंध द्वारा जुड़ा हुआ है ।
  • मानव समाज में परस्पर निम्न संबंध दृष्टिगोचर होता है :-

1. पिता-माता एवं पुत्र-पुत्री संबंध

2. पति-पत्नी संबंध,

3. गुरु और शिष्य संबंध,

4. भाई और बहिन संबंध,

5. साथी-सहयोगी संबंध,

6. व्यवस्था और समग्र व्यवस्था संबंध,

7. मित्र संबंध ।

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