● दु:ख से मुक्ति तथा भ्रम से मुक्ति - ऐसे भेद से ही मुक्ति के लिये प्रयास है, इसी के लिये समस्त अध्ययन, उपासना, प्रयोग, व्यवहार, व्यवसाय, अभ्यास और निष्ठा संपन्न हुई है । विगत परंपरा में मुक्ति का कोई प्रमाण अथवा उपाय अध्ययन गम्य नहीं हुआ है । इसीलिए भ्रम मुक्ति हेतु यह प्रस्ताव है ।
● अध्ययन से हर इकाई की गठन, प्रक्रिया, आचरण परिणाम एवं उसका प्रयोजन स्पष्ट होता है ।
# रूप, गुण परिवर्तनशील है, जबकि तत्व शाश्वतवादी है क्योंकि तत्व चारों अवस्थाओं में पाया जाता है । सभी वृहत इकाईयों के गठन का मूल तत्व परमाणु है । सभी तत्वों के परमाणु का गठन सिद्धांत समान है । परमाणु का गठन भी मध्यांश तथा आश्रित अंशों से है । परमाणु में समाहित अंशों की सक्रियता एवं विकास क्रम भेद से ही सभी अवस्थाएँ हैं ।
● अध्ययन ही उपासना है । प्रमाणित मानव ही अध्यापक है जिनके सान्निध्य में ही अध्ययन है । अध्ययनपूर्वक समझदारी से तदाकार तद्रूपता पूर्वक स्वत्व, स्वतंत्रता अधिकार होता है ।
⁘ अध्यापक :- अनुभव मूलक विधि से अनुभव गामी पद्धति पूर्वक सहअस्तित्व रूपी सत्य बोध कराने वाला ।
● प्रयोग से उपयोगी साधनों की पहचान होता है ।
● उत्पादन से उपयोगी सामग्रियों की उपलब्धि एवं विपुलीकरण होता है ।
● अभ्यास से कुशलता-निपुणता-पाण्डित्य में पारंगत होना प्रमाणित होता है ।