अध्याय - 8

पद एवं पदातीत

  • पद एवम् पदातीत के भेद से अर्थ है ।
  • पदों का वर्गीकरण, अपेक्षाकृत ढंग से, रूप-गुण, स्वभाव-धर्म की अवस्था एवम् अनुपात के अध्ययन से सिद्ध है, इसलिए पद अनेक और पदातीत व्यापक है ।
  • पद का निर्णय रूप के अनुपात, उसकी अवस्था (स्वभाव) तथा उसमें निहित बल और शक्ति से होता है । यही स्थिति-गति है ।
  • जो किसी पद में नहीं हो या सीमित न हो, जिसमें ही सभी पद निहित हों या जिसमें उनका समावेश भी हो, उसे पदातीत की संज्ञा है । यह व्यापक सत्ता ही है ।
  • आकार, आयतन और घनत्व के भेद से रूप का; नाद, गति, भाषा, परिभाषा के भेद से शब्द का तथा उद्भव, विभव एवम् प्रलय के भेद से गुण की अवस्था एवम् अनुपात है ।
  • नियम एवम् प्रक्रियापूर्वक सिद्ध सिद्धि की ‘अर्थ’ संज्ञा है, आचरण ही नियम है ।
  • सर्वत्र प्राप्त साम्य सत्ता में अनुभूति (ज्ञान) की ‘पदातीत अर्थ’ संज्ञा है, क्योंकि उसके अस्तित्व का अनुभव है । यह साम्य सत्ता सम्पूर्ण क्रिया के मूल रूप में है और मानव के द्वारा ज्ञान के रूप में प्राप्त है और स्पष्ट है ।
  • सर्वत्र एक ही प्रकार से स्थित होने के कारण साम्य सत्ता की ही व्यापक संज्ञा है । इसलिये पदातीत व्यापक और पद अनेक एवं सीमित है, क्योंकि इकाईयाँ अनन्त है।
  • हर इकाई अपने ह्रास या विकास पूर्वक क्षमता, योग्यता, पात्रता के अनुसार अपने-अपने पद में अवस्थित है ।
  • पद का निर्णय इकाई के गठन, प्रक्रिया एवम् आचरण से होता है ।
  • पद भेद से अर्थ भेद, अर्थ भेद से आचरण और व्यवहार भेद, आचरण और व्यवहार भेद से प्रक्रिया भेद तथा प्रक्रिया भेद से अर्थ भेद है ।
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