• # पर-वैराग्य का तात्पर्य :- जागृति के लिए सभी विरोधी (अतिव्याप्ति, अनाव्याप्ति, अव्याप्ति) दोषों से मुक्त होना पर-वैराग्य संज्ञा है । पर का तात्पर्य ही जागृति प्रमाणित होना है ।

“सर्व शुभ हो”

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