- ● 1. पुरुष का जीवन यतित्व से सफल है । पुरुष में जागृति को प्रमाणित करना यतित्व है ।
- ● 2. स्त्री का जीवन सतीत्व से सफल है । स्त्रियों में जागृति का प्रमाणित होना सतीत्व है ।
- ● 3. माता-पिता का जीवन व्यक्तित्व से ।
- ● 4. पुत्र का जीवन नैतिकता के प्रति निष्ठा से ।
- ● 5. व्यवस्था, न्यायपूर्ण नियम के समर्थन व पालन से ।
- ● 6. प्रजा का जीवन समग्र व्यवस्था में भागीदारी से तथा अनुशासन एवं नियम को स्वीकारने से ।
- ● 7. गुरु का जीवन अनुभव को प्रामाणिकता पूर्वक अध्ययन कराने से ।
- ● 8. शिष्य का जीवन गुरु द्वारा कराये गये अध्ययन के श्रवण, मनन तथा अर्थबोध सम्पन्नता से ।
- ● 9. सहयोगी का जीवन कर्त्तव्य को निर्वाह करने से ।
- ● 10. साथी का जीवन दायित्वों को निर्वाह करने से ।
- ● 11. भाई या बहन का जीवन एक दूसरे के अनन्य जागृति की आशा एवं प्रयास से तथा स्नेह सहित दायित्व वहन करने से ।
- ● 12. मित्र का जीवन परस्पर दिखावा रहित उदारता पूर्ण, समृद्धि सहित सर्वतोमुखी समाधान को प्रमाणित करने से सफल है ।
- ● उपरोक्तानुसार व्यवहार करने में समस्त मानव पाँचों स्थितियों में सफल हो जाय, यही धर्म-नैतिक व्यवस्था का कार्यक्रम व उद्देश्य है तथा शोषण के लिए प्राप्त समस्त प्रवृत्तियों का समूल निराकरण, मात्र उपरोक्तानुसार प्रतिष्ठित आचरण से ही संभव है । इसी विधि से अखण्ड समाज का प्रतिष्ठित होना स्पष्ट है ।
Table of contents
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-20
मानव व्यवहार दर्शन
-19
विकल्प
-14
मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व
-8
लेखकीय
-6
संदेश
-4
मध्यस्थ दर्शन में प्रतिपादित मूल बिन्दु
-2
कृतज्ञता
1
1. सहअस्तित्व
4
2. कृतज्ञता
6
3. सृष्टि-दर्शन
17
4. मानव सहज प्रयोजन
47
5. निर्भ्रमता ही विश्राम
60
6. कर्म एवं फल
62
7. मानवीय व्यवहार
68
8. पद एवं पदातीत
70
9. दर्शन-दृश्य-दृष्टि
78
10. क्लेश मुक्ति
84
11. योग
87
12. लक्षण, लोक, आलोक एवं लक्ष्य
95
13. मानवीयता
99
14. मानव व्यवहार सहज नियम
113
15. मानव सहज न्याय
124
16. पोषण एवं शोषण
132
(i) मानव धर्म नीति
Subsection
143
(ii) मानव राज्य-नीति
152
17. रहस्य मुक्ति
169
18. सुख, शांति, संतोष और आनन्द