• ईष्ट :- प्रयोजनशील व सार्थक इच्छा के अनुकूल मानवीयतापूर्ण व अतिमानवीयता सहज उपलब्धि ।
  • समाधान समृद्धि अभय सहअस्तित्व सहज ज्ञान, विवेक, विज्ञान है ।
  • अनिष्ट :- प्रयोजनशील व सार्थक इच्छा के प्रतिकूल उपलब्धि ।
  • उत्थान :- मानवीयता की ओर गति ।
  • पतन :- अमानवीयता की ओर गति ।
  • ह्रास :- अधिक मूल्यन से न्यून मूल्यन की ओर परिणाम ।
  • विकास :- न्यून मूल्य से अधिक मूल्य की ओर परिणाम ।
  • शोषण :- भ्रमवश किया गया कार्य-व्यवहार ।
  • पोषण :- मानवीयता, अतिमानवीयता सहज परंपरा ।
  • अनुचित :- समय, परिस्थिति तथा घटनाओं के संदर्भ में मानवीयता या अतिमानवीयता का शोषण, विरोध ।
  • उचित :- समय, परिस्थिति तथा घटनाओं के अनुसार मानवीयता या अतिमानवीयता का पोषण ।
  • लाभ :- कम वस्तु व सेवा के बदले में अधिक वस्तु व सेवा का पाना ।
  • हानि :- अधिक वस्तु व सेवा के बदले में कम वस्तु व सेवा का पाना ।
  • न्याय :- मानवीयता के पोषण के लिए संपादित क्रियाकलाप व व्यवहार । संबंधों की पहचान, मूल्यों का निर्वाह, मूल्यांकन, उभयतृप्ति ही न्याय है ।
  • अन्याय :- मानवीयता के विपरीत शोषण के लिए किया गया क्रियाकलाप व व्यवहार तथा अमानवीयतावश क्रियाकलाप व व्यवहार ही अन्याय है ।
  • पुण्य :- मानवीयता तथा अतिमानवीयतापूर्ण व्यवहार ।
  • पाप :- अमानवीयतावादी व्यवहार ।
Page 174 of 219