• विधि :- सामाजिकता, मानवीयता, अखण्ड समाज सार्वभौम व्यवस्था की संरक्षण पोषणवादी नीति, कार्य व्यवहार ।
  • निषेध :- सामाजिकता की शोषणवादी नीति, अमानवीय कार्य व्यवहार । जीव चेतनावश किया गया समस्त कार्य व्यवहार विचार ।
  • कर्त्तव्य :- प्रत्येक स्तर पर प्राप्त संबंध एवं संपर्क के मध्य निहित मानवीयतापूर्ण आशा व प्रत्याशा पूर्वक व्यवहार । संबंधों की पहचान, मूल्यों का निर्वाह ।
  • अकर्त्तव्य :- प्रत्येक स्तर पर प्राप्त संबंध एवं संपर्क के मध्य निहित मानवीयतापूर्ण आशा व प्रत्याशा का निर्वाह न करने के स्थान पर अमानवीयतावादी आचरण अकर्तृत्व है ।
  • समाधान :- प्रत्येक क्रिया के लिए परिशिष्ट एवं परिमार्जित पद्धति के अनुसरण में स्थिति सत्य वस्तुगत सत्य एवं वस्तुस्थिति का ज्ञान तथा सही, क्यों, कैसे का उत्तर, समाधान ।
  • समस्या :- पशुमानव, राक्षस मानव का कार्य व्यवहार । समाधान के विपरीत में समस्या ।
  • आवश्यक :- मानवीयता तथा अतिमानवीयता की ओर प्रगति ।
  • अनावश्यक :- अमानवीयता की ओर गति ।
  • चालन :- त्वरणन ।
  • संचालन :- संगठित रूप से पूर्णता के अर्थ में चालन, विधिवत चालन ।
  • प्रति-संचालन :- संतुलित रूप में त्वरणन ।
  • प्रतिपालन :- जीवन में व्यतिक्रम का निवारण ।

न्याय, धर्म, सत्य प्रतीत होने के अर्थ में पालन ।

  • परिपालन :- परम्परा के अर्थ में पालन ।
  • परिपोषण :- जीवन-क्रम को जागृति सहज निरंतरता प्रदान करना ।
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