दूसरों को न्याय उपलब्ध कराने में अपनी भौतिक व बौद्धिक शक्तियों का नियोजन करना ।
धीरता :- न्याय के प्रति निष्ठा एवं दृढ़ता ।
भाव, संवेग
भाव :- मौलिकता=मूल्य=जिम्मेदारी, भागीदारी ।
संवेग :- संयोग से प्राप्त गति ।
जाति, काल
जाति :- रूप, गुण, स्वभाव व धर्म की विशिष्टता, भौतिक क्रिया, एकता, विविधता ।
भौतिक वस्तु में अनेक प्रकार के परमाणु ।
काल :- क्रिया की अवधि ।
तुष्टि, पुष्टि
तुष्टि :- समझदारी पूर्वक छ: सद्गुणों से संपन्न होना, परिवार में समाधान, समृद्धि को प्रमाणित करना । अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था में भागीदारी करना निरंतर तुष्टि का स्वरूप है ।
पुष्टि :- तुष्टि का निरंतर मूल्यांकन में निरीक्षण, परीक्षणपूर्वक किया जाना । पूर्णता की निरंतरता ही जीवन सहज संतुष्टि है । मानव परंपरा के रूप में उसका लोकव्यापीकरण होना ही पुष्टि है ।
मन सहज चौसठ क्रियाएँ
चयन व आस्वादन रूपी चौसठ क्रियाकलाप
भक्ति, तन्मयता
भक्ति :- भय से मुक्त होने का क्रियाकलाप और श्रम मुक्ति ।