पूज्यता :- गुणात्मक विकास और जागृति के लिए सक्रियता ।
वृत्ति सहज छत्तीस क्रियायें
तुलन एवं विश्लेषण रूपी छत्तीस क्रियाकलाप
विद्या, प्रज्ञा
विद्या :- जो जैसा है, अर्थात् जिस प्रयोजनार्थ है उसे वैसा ही विधिवत् जानने, मानने, स्वीकार करने की क्रिया ।
प्रज्ञा :- परिष्कृति पूर्ण संचेतना ।
यथार्थ और यथार्थ सहज अनुमान अनुभव क्रिया ।
वस्तुगत सत्य, वस्तु स्थिति सत्य के प्रति अवधारणा एवं अनुभव मूलक गति और स्थिति सत्य में बोध व अनुभव मूलक गति है ।
कीर्ति, विचार (वस्तु)
कीर्ति :- जागृति की ओर सक्रियता ।
वर्तमान में विकास और जागृति के संदर्भ में की गई श्रेष्ठता व सुलभता की प्रामाणिक प्रस्तुति ।
विचार :- स्फुरण पूर्वक सत्यता को उद्घाटित करने हेतु की गई क्रिया ।
सहअस्तित्व सहज प्रकाशन, संप्रेषणा, अभिव्यक्ति ।
निश्चय, धैर्य
निश्चय :- सत्यतापूर्ण विचार की निरंतरता ।
लक्ष्य, दिशा और प्रयोजन की ओर गति ।
सत्यता पूर्ण विचार की निरंतरता ।
धैर्य :- न्यायपूर्ण विचार की निरंतरता ।